अमेरिका द्वारा चीन की कुछ कंपनियों और रिफाइनरियों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव और गहरा गया है। इस कदम को लेकर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने खुलकर अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया के कई हिस्सों में जो दखल देता है, वह किसी सिद्धांत या लोकतंत्र के लिए नहीं बल्कि अपने आर्थिक हितों के लिए होता है। उनके अनुसार, यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार को नियंत्रित करने की रणनीति का हिस्सा है, जिससे अन्य देशों पर दबाव बनाया जा सके।
लावरोव का सीधा आरोप
लावरोव ने अपने बयान में साफ कहा कि अमेरिका की नजर उन देशों पर ज्यादा रहती है जहां तेल और प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर मौजूदगी है। उन्होंने Venezuela और Iran का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में अमेरिकी सक्रियता के पीछे असली वजह ऊर्जा संसाधनों पर पकड़ बनाना है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका इस तरह की नीतियां अपनाता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में पहले से ही तनाव चरम पर है और तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों पर खतरा
रूस के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर और भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास में कई बार अमेरिका ने दूसरे देशों में सत्ता परिवर्तन, हस्तक्षेप और कठोर कदम उठाए हैं। लावरोव के अनुसार, इस तरह की नीतियों से अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया एक ऐसे दौर में पहुंच रही है जहां “जिसके पास ताकत है, वही सही है” जैसी सोच हावी हो रही है। यह स्थिति वैश्विक स्थिरता के लिए खतरे का संकेत मानी जा रही है।
बातचीत की सलाह
लावरोव ने अमेरिका को सलाह देते हुए कहा कि अगर किसी देश की नीतियों से असहमति है, तो टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। इस बीच रूस ने यह चेतावनी भी दी है कि अमेरिका और Israel शांति वार्ता के नाम पर ईरान के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका ने अपने प्रतिनिधियों को Pakistan भेजने का फैसला किया है, जहां ईरान से जुड़ी संभावित बातचीत हो सकती है। उधर, Donald Trump ने कहा है कि अमेरिका किसी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और भी जटिल हो सकती है।
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