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इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल और तुरंत बड़ा एक्शन! ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से क्यों लौटाए पाकिस्तान के तेल टैंकर?

इस्लामाबाद में US-ईरान वार्ता फेल होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से पाकिस्तान के तेल टैंकर लौटे। बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता।

होर्मुज स्ट्रेट से पाकिस्तान के तेल टैंकर लौटे

Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच हुई अहम शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। कई घंटों तक चली बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। वार्ता के खत्म होते ही ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया। इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधियों की भी वापसी हुई, जिससे साफ संकेत मिला कि फिलहाल बातचीत का रास्ता आसान नहीं है। इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक हलकों में चिंता बढ़ गई है।

तेल टैंकरों की वापसी ने बढ़ाई हलचल

इसी बीच एक और बड़ी खबर सामने आई, जिसने तनाव को और गहरा कर दिया। पाकिस्तान के दो तेल टैंकर ‘शालमार’ और ‘खैरपुर’ Strait of Hormuz की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन उन्हें बीच रास्ते से ही लौटना पड़ा। ये टैंकर फारस की खाड़ी की तरफ जा रहे थे और एक सुरक्षित मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि अचानक उन्हें वापसी का निर्देश मिला, जिससे समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि टैंकरों को वापस लौटने के लिए किस कारण मजबूर होना पड़ा, लेकिन इसे मौजूदा तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

ईरान का सख्त रुख, अमेरिका पर लगाए आरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के दौरान अमेरिका की कुछ मांगें ऐसी थीं, जिन्हें स्वीकार करना संभव नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीति उनके लिए जल्दबाजी का नहीं, बल्कि धैर्य और रणनीति का विषय है। ईरानी पक्ष का दावा है कि अमेरिका समय का दबाव बनाकर बातचीत को अपने पक्ष में मोड़ना चाहता था, लेकिन उन्होंने ऐसा होने नहीं दिया। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास और बढ़ गया है।

ऊर्जा बाजार पर असर की आशंका, दुनिया की नजरें टिकीं

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल का वैश्विक व्यापार होता है। ऐसे में टैंकरों की वापसी और वार्ता के विफल होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बना रहा, तो तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं और सभी को यह जानने का इंतजार है कि आगे कूटनीतिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाएंगे।

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