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कश्मीर की सड़कों पर खामेनेई के पोस्टर, अमेरिका-इजरायल के खिलाफ गूंजे नारे… क्या मिडिल ईस्ट की जंग का असर अब भारत तक?

ईरान पर अमेरिका-इजरायल हमले के खिलाफ कश्मीर के बड़गाम में प्रदर्शन। खामेनेई के पोस्टरों के साथ नारेबाजी, ईरान में फंसे कश्मीरी छात्रों को लेकर बढ़ी चिंता।

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब भारत के कश्मीर तक दिखाई देने लगा है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई के बाद कश्मीर के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। बड़गाम जिले में सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और ईरान के समर्थन में नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के बड़े-बड़े पोस्टर दिखाई दिए। भीड़ ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारे लगाए। स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे और किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

-बड़गाम में उभरा गुस्सा, सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग

कश्मीर के बड़गाम में शिया समुदाय के लोगों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ और ‘इजरायल मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। कई लोग हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर मार्च करते दिखे। उनका कहना था कि ईरान पर हमला अन्यायपूर्ण है और इसका विरोध होना चाहिए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, लेकिन नारेबाजी तेज रही। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा बलों ने एहतियातन इलाके में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और शांति बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

मध्य पूर्व में बढ़ते हमले, जवाबी कार्रवाई का दावा

इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद पूरे मध्य पूर्व में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में हमलों की खबरें आई हैं। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा करते हुए क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है। इस टकराव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी पृष्ठभूमि में कश्मीर में हो रहे विरोध प्रदर्शन को भी व्यापक वैश्विक घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।

-ईरान में फंसे कश्मीरी छात्र, नेताओं की अपील

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और चिंता सामने आई है—ईरान में पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्र। पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और मौजूदा मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में छात्रों से अपील की थी कि वे सुरक्षित रहते हुए भारत लौट आएं। कुछ छात्र पहले ही वापस आ चुके हैं, लेकिन अब भी कई छात्र ईरान में मौजूद हैं। एयरस्पेस की स्थिति और सुरक्षा हालात को देखते हुए उनके परिवारों में चिंता बढ़ी हुई है। प्रशासनिक स्तर पर संपर्क बनाए रखने की कोशिशें जारी हैं। कुल मिलाकर, मध्य पूर्व की इस जंग का असर अब सीमाओं से बाहर निकलकर भावनात्मक और सामाजिक स्तर पर भी महसूस किया जा रहा है।

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