Donald Trump की ओर से होर्मुज को टोल फ्री”घोषित किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। Iran ने साफ किया है कि वह इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर पारंपरिक टोल टैक्स नहीं लगाएगा, लेकिन कुछ सेवाओं के बदले शुल्क वसूला जा सकता है। तेहरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के तहत किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर सीधा टोल लगाना उचित नहीं माना जाता, लेकिन सुरक्षा, निगरानी या अन्य सुविधाओं के लिए शुल्क लिया जा सकता है। हालांकि, ईरान ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह किन सेवाओं के लिए फीस वसूलेगा। इसी वजह से वैश्विक बाजार और शिपिंग कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग पर क्यों बढ़ा सस्पेंस?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इस जलमार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हुई थीं। इसके बाद जहाजों की आवाजाही, बीमा लागत और तेल कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब जबकि इस मार्ग को फिर से सामान्य रूप से खोलने की बात हो रही है, ईरान के नए बयान ने स्थिति को पूरी तरह साफ होने से रोक दिया है।
ट्रंप ने समझौते को बताया बड़ी कामयाबी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से पूरी तरह खुल जाएगा। उन्होंने कहा था कि इस समझौते से क्षेत्र में लंबे समय से बना तनाव कम होगा और समुद्री व्यापार सामान्य हो सकेगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को स्थायी रूप से “टोल फ्री” रखा जाएगा। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस कदम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को स्थिरता मिलेगी और तेल की कीमतों में अनिश्चितता कम होगी। हालांकि, ईरान के हालिया बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या दोनों देशों के बीच “टोल फ्री” शब्द की परिभाषा अलग-अलग है।
फीस वसूली से वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान किसी भी प्रकार का सेवा शुल्क लागू करता है, तो इसका असर शिपिंग कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। अतिरिक्त खर्च बढ़ने की स्थिति में तेल और गैस की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर शुल्क वसूली का यह मॉडल भविष्य में दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बन सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान किन सेवाओं के बदले शुल्क लेने की योजना बना रहा है और क्या अमेरिका इस व्यवस्था को स्वीकार करेगा। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत से स्थिति और स्पष्ट हो सकती है, लेकिन फिलहाल होर्मुज को लेकर अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
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