ईरान में 47 साल पुरानी इस्लामिक सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ रहे हैं। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद शाह मोहम्मद रजा पहलवी को सत्ता से हटाकर अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के नेतृत्व में शिया इस्लामी शासन की स्थापना हुई थी। आज इसी शासन के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। देश में बढ़ती महंगाई, आर्थिक तंगी और रोजगार की कमी ने जनता में गुस्से का ज्वार पैदा कर दिया है।
महिला का अद्भुत साहस
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें एक महिला प्रदर्शनकारियों के बीच खड़ी है और उसके मुंह से खून बह रहा है। इसके बावजूद उसने विरोध जारी रखा और नारे लगाए। इस वीडियो ने पूरी दुनिया में ईरानी जनता के हौसले और साहस को सामने ला दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक महिला का साहस नहीं बल्कि पूरे देश के लोगों के जुझारू हौसले का प्रतीक बन गया है।
हिंसा और सरकारी कार्रवाई
विरोध प्रदर्शन अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। ईरान की सरकार ने इस आंदोलन को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब तक 42 लोग प्रदर्शन के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। वहीं, 2,270 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। सुरक्षा बल और पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का मनोबल नहीं टूटा और लोग लगातार सड़कों पर आ रहे हैं।
देश में सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
विरोध प्रदर्शन ने ईरान के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इन प्रदर्शन पर नजर बनाए हुए है। कुछ देशों ने ईरान की सरकार से हिंसा रोकने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। वहीं, ईरानी लोगों की उम्मीद और साहस यह दिखा रहे हैं कि बदलाव की हवा धीरे-धीरे देश में महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने इस आंदोलन की गंभीरता को नहीं समझा तो भविष्य में बड़े पैमाने पर संकट पैदा हो सकता है।
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