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शॉल समझकर ओढ़ रखी थी चादर, लिखे शब्दों ने खोला राज? VIDEO वायरल

रेलवे की ‘Western Railway’ लिखी चादर ओढ़े तीन लोगों का VIDEO वायरल है। जानें वीडियो में क्या दिखा और RTI में रेलवे के बेडरोल चोरी से जुड़े कितने चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए।

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Viral Video: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में तीन लोग सड़क किनारे बाजार जैसी जगह पर नजर आ रहे हैं और उन्होंने सफेद रंग की चादरें शरीर पर शॉल या कंबल की तरह लपेट रखी हैं। लोगों का ध्यान तब इस ओर गया, जब चादरों पर ‘Western Railway’ लिखा दिखाई दिया। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि रेलवे की पहचान वाली ये चादरें बाजार तक कैसे पहुंचीं। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि ये रेलवे की ट्रेन से चोरी की गई बेडशीट हो सकती हैं। हालांकि, वायरल वीडियो से इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती। यह भी साबित नहीं होता कि वीडियो में दिख रहे लोगों ने ही चादरें रेलवे से चोरी की हैं। इसलिए फिलहाल इसे रेलवे की चादरों के कथित निजी इस्तेमाल से जुड़े वायरल वीडियो के तौर पर ही देखा जा रहा है।

RTI के आंकड़ों ने बढ़ाई चर्चा

वीडियो वायरल होने के बाद रेलवे के बेडरोल सामान के गायब होने से जुड़े आंकड़े भी चर्चा में आ गए हैं। RTI से मिली जानकारी के मुताबिक जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच AC ट्रेनों से कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम गायब या चोरी होने की जानकारी सामने आई। इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बेडरोल कॉन्ट्रैक्टर्स को करीब 104.51 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। यह डेटा 69 में से 54 रेलवे डिवीजनों से मिले जवाबों पर आधारित है और कुछ जगहों से जानकारी अधूरी थी। ऐसे में वास्तविक संख्या इससे अधिक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार 2022 से 2025 के बीच बेडरोल सामान के गायब होने की घटनाओं में 56 फीसदी की बढ़ोतरी भी दर्ज की गई।

वीडियो पर सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने रेलवे की संपत्ति के कथित निजी इस्तेमाल पर नाराजगी जताई और सार्वजनिक सामान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग भी की। वहीं कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर लोगों को ऑनलाइन निशाना बनाने पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि सिर्फ वीडियो में रेलवे की मार्किंग वाली चादर दिखने से चोरी का आरोप लगाना सही नहीं होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि वीडियो में दिख रहे तीनों लोगों ने रेलवे से चादरें चुराई थीं। इसलिए वायरल दावे और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर रखना जरूरी है। इस वीडियो ने हालांकि रेलवे के बेडरोल सामान की सुरक्षा और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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