उत्तर प्रदेश की राजनीति में पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता सतीश द्विवेदी का एक कथित वीडियो चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में उन्हें कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाया जा रहा है कि वह यादव समाज के लोगों की पैरवी नहीं करते। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। मामले को लेकर विपक्ष ने भी बीजेपी पर निशाना साधना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ता देख सतीश द्विवेदी ने खुद सामने आकर अपनी बात रखी। उन्होंने वायरल वीडियो को फर्जी बताते हुए दावा किया कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद से तैयार किया गया है।
पूर्व मंत्री ने बताई असली बात, बोले- मैंने क्या कहा था?
सतीश द्विवेदी ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर वीडियो जारी कर वायरल दावे का खंडन किया। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। द्विवेदी के मुताबिक, उन्होंने कहा था कि वह किसी की पैरवी नहीं करते और अगर किसी मामले में पैरवी करते हैं तो उसका समाधान कराकर ही पीछे हटते हैं। उन्होंने बताया कि यह बात ग्राम वेंव मुस्तहकम के एक गरीब परिवार के युवक की कथित पिटाई के मामले में कही गई थी। इस मामले में उन्होंने त्रिलोकपुर थाने के एक इंस्पेक्टर को निलंबित कराने का जिक्र किया था। उनका आरोप है कि कुछ लोगों ने उनके बयान को बदलकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है।
यादव समाज के लोगों के नाम गिनाकर दिया जवाब
द्विवेदी ने अपनी सफाई में कहा कि वह पूरे हिंदू समाज को एक परिवार मानकर चलते हैं। यादव समाज के लोगों के साथ भी उनके अच्छे संबंध हैं। उन्होंने अपने साथ जुड़े कई यादव नेताओं और कार्यकर्ताओं के नाम गिनाए। साथ ही प्रतापपुर मेठिया और भटमली की घटनाओं का उल्लेख करते हुए दावा किया कि क्षेत्र में यादव परिवारों पर संकट आने पर वह और उनके कार्यकर्ता मदद के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में यादव समाज के कई पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि हैं, जिनके काम के लिए वह प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार संपर्क करते रहते हैं।
सपा ने साधा निशाना, बीजेपी नेता की सफाई से बढ़ी चर्चा
इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी ने भी बीजेपी को घेरने का मौका नहीं छोड़ा। सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने वायरल वीडियो साझा करते हुए एक्स पर पोस्ट किया और बीजेपी की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता जाति और धर्म के आधार पर लोगों के साथ व्यवहार करते हैं। हालांकि, सतीश द्विवेदी ने इन आरोपों को गलत बताते हुए वीडियो को AI से बनाया गया बताया है। अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल वायरल वीडियो की वास्तविकता और उसके स्रोत को लेकर है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
