अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रही चर्चा के बीच उत्तर प्रदेश का गोरखनाथ मंदिर भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसकी वजह यहां की एक खास परंपरा है। इस मंदिर में कई सालों से मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिर के जरूरी काम संभाल रहे हैं। खास बात यह है कि चंदे और निर्माण से जुड़े कामों की जिम्मेदारी निभाने के बावजूद आज तक किसी तरह की गड़बड़ी या पैसे के गलत इस्तेमाल का मामला सामने नहीं आया। यही कारण है कि यह मंदिर भरोसे और आपसी मेल-जोल की मिसाल माना जाता है।
यासीन अंसारी कई सालों से संभाल रहे हैं बड़ी जिम्मेदारी
गोरखनाथ मंदिर से जुड़े यासीन अंसारी पिछले कई दशकों से मंदिर के साथ काम कर रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने मंदिर में कैशियर की जिम्मेदारी निभाई थी। बाद में उन्हें निर्माण कार्यों और खर्च का हिसाब देखने की जिम्मेदारी दी गई। आज भी वह मंदिर में बनने वाले भवनों, उनके बजट, खर्च और काम की निगरानी करते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि इतने लंबे समय में उनके काम पर कभी कोई सवाल नहीं उठा और न ही पैसों के हिसाब में कोई गड़बड़ी मिली।
योगी आदित्यनाथ भी करते हैं भरोसा
मंदिर प्रशासन के मुताबिक, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर आते हैं, तो मंदिर में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी भी लेते हैं। इस दौरान यासीन अंसारी उन्हें निर्माण कार्य और खर्च से जुड़ी जानकारी देते हैं। मंदिर में होने वाले कई बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी भी वही करते हैं। यही वजह है कि मंदिर प्रशासन उन्हें अपने सबसे भरोसेमंद लोगों में गिनता है।
कई मुस्लिम परिवार वर्षों से कर रहे हैं मंदिर की सेवा
गोरखनाथ मंदिर में सिर्फ यासीन अंसारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य मुस्लिम परिवार भी वर्षों से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कोई मंदिर की गौशाला की देखभाल करता है तो कोई निर्माण कार्य में मदद करता है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि यहां काम करने वाले लोगों को धर्म नहीं, बल्कि उनकी ईमानदारी और मेहनत के आधार पर जिम्मेदारी दी जाती है। यही कारण है कि यह मंदिर आज भी आपसी विश्वास, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का एक अच्छा उदाहरण माना जाता है।
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