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दुनिया में मचा था ईंधन संकट, लेकिन भारत क्यों नहीं हुआ परेशान? PM मोदी ने पहली बार खोले बड़े राज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की रणनीति, डिप्लोमैसी और ईंधन आपूर्ति को लेकर बड़ा बयान दिया। जानिए कैसे भारत ने युद्ध के दौर में भी पेट्रोल-डीजल की कमी नहीं होने दी।

PM Narendra Modi

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट की चपेट में आ गई, लेकिन भारत इस मुश्किल दौर में भी अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जब कई देशों में ईंधन की भारी कमी देखने को मिली, तब भारत ने समय रहते हालात का आकलन किया और उसी के अनुसार रणनीति बनाई। उन्होंने कहा कि सरकार ने संसाधनों का संतुलित उपयोग किया, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय कूटनीति अपनाई और लगातार हालात पर नजर रखी। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन फैसलों की वजह से देश में आम लोगों को बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ा और आवश्यक ईंधन की उपलब्धता बनी रही।

अफवाहों के बीच सरकार ने उठाए कई बड़े कदम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संकट के दौरान कुछ लोग भ्रम और आशंकाएं फैलाने में लगे रहे, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान समाधान पर था। उन्होंने बताया कि देश के कुछ दूरदराज इलाकों में आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई, लेकिन कहीं भी गंभीर ईंधन संकट पैदा नहीं होने दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अप्रैल से जून के बीच सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री में लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके बावजूद सरकार ने इस वित्तीय बोझ को खुद उठाया ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी घटाकर राहत देने का भी फैसला लिया गया।

डिप्लोमैसी बनी सबसे बड़ी ताकत

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में भारत के दूसरे देशों के साथ मजबूत रिश्तों का बड़ा लाभ मिला। उन्होंने बताया कि संकट शुरू होने से पहले भारत लगभग 25 से 26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन हालात बदलने के बाद सरकार ने तेजी से नए विकल्प तलाशे और 40 से अधिक देशों से तेल और ईंधन की खरीद शुरू की। उनके मुताबिक, यह भारत की सक्रिय विदेश नीति का परिणाम था कि ऊर्जा आपूर्ति की श्रृंखला बाधित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य देशहित और नागरिकों के हितों की रक्षा करना था और इसी सोच के साथ हर फैसला लिया गया।

आत्मनिर्भर भारत पर फिर दिया जोर

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि किसी भी देश का सम्मान तभी सुरक्षित रहता है, जब वह अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर कम निर्भर हो। उन्होंने राजस्थान में विकास परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार केवल शिलान्यास करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि योजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए लगातार काम करती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता, मजबूत बुनियादी ढांचा और प्रभावी नीति ही भारत को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए सक्षम बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि देश इसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भारत और अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई देगा।

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