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UP में अफसर बनाम अफसर की जंग! iPhone रिश्वत के आरोप, तहसीलदार पर ही गिरी गाज, आखिर क्या है सच?

फिरोजाबाद में तहसीलदार और DM के बीच विवाद बढ़ा। iPhone रिश्वत के आरोप के बाद तहसीलदार पर कार्रवाई, मामले की जांच कमिश्नर को सौंपी गई।

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UP News: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में दो वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विवाद अब बड़े प्रशासनिक संकट में बदलता नजर आ रहा है। टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा और जिलाधिकारी रमेश रंजन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह मामला तेजी से चर्चा में है। तहसीलदार द्वारा गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद सरकार ने उल्टा उन पर ही कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया और लखनऊ स्थित राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया। इस कदम के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह कार्रवाई अनुशासन के तहत की गई है या फिर किसी बड़े विवाद को दबाने की कोशिश है।

 iPhone और iWatch को लेकर रिश्वत के गंभीर आरोप

राखी शर्मा ने दावा किया है कि उनसे कथित तौर पर लगभग 1.75 लाख रुपये कीमत का iPhone और iWatch रिश्वत के रूप में लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मांग जिलाधिकारी कार्यालय से जुड़े कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई थी और बाद में यह डिवाइस इस्तेमाल में भी लाया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उनसे एक जमीन से जुड़े मामले की जांच रिपोर्ट को बदलने का दबाव बनाया गया था। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उनका वेतन भी कई महीनों तक रोक दिया गया। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

सरकार का एक्शन 

तहसीलदार के सार्वजनिक आरोपों के बाद शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें पदमुक्त कर दिया और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए। इस जांच की जिम्मेदारी कमिश्नर विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है, जो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करेंगे। प्रशासन का कहना है कि जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी और उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी ओर, जिलाधिकारी की तरफ से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे मामला और रहस्यमय बन गया है।

 सवालों के घेरे में सिस्टम, आगे क्या होगा?

यह विवाद केवल दो अधिकारियों के बीच टकराव तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर जहां राखी शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हस्तक्षेप की मांग की है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपनाया है। ऐसे में अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कौन जिम्मेदार है। फिलहाल यह मामला उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इसके और खुलासे होने की संभावना है।

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