अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) दान की पूरी प्रक्रिया की बारीकी से पड़ताल कर रहा है। जांच का दायरा केवल नकद राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि सोने-चांदी के आभूषण, हीरे-जवाहरात और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे का संग्रह, गिनती और सुरक्षित जमा करने की प्रक्रिया तय नियमों के मुताबिक हुई या नहीं। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देशभर के श्रद्धालुओं की नजर जांच की हर गतिविधि पर बनी हुई है।
टिन्नू यादव और गोपाल राव से फिर पूछे गए सवाल
जांच के तहत एसआईटी ने एक बार फिर राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और गोपाल राव से लंबी पूछताछ की है। दोनों से चढ़ावे की गिनती, कीमती वस्तुओं के रखरखाव और उनके रिकॉर्ड से जुड़े कई सवाल किए गए। इसी दौरान मंदिर के पुजारी से भी हीरे जड़े हार और चरण पादुका के बारे में जानकारी ली गई। पूछताछ में बताया गया कि विशेष अवसरों पर उपयोग के बाद ये वस्तुएं संबंधित जिम्मेदार लोगों को वापस सौंप दी जाती थीं। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि कुछ सोने के आभूषणों को गलाकर ईंट के रूप में सुरक्षित रखने की योजना पर चर्चा हुई थी। हालांकि, जब इस संबंध में रिकॉर्ड और भौतिक साक्ष्य की जांच की गई तो कथित सोने की ईंट और उससे जुड़े दस्तावेज नहीं मिले। यही बिंदु अब जांच का केंद्र बन गया है।
सीसीटीवी फुटेज और बैंक रिकॉर्ड से जोड़े जा रहे तथ्य
एसआईटी केवल बयानों के आधार पर आगे नहीं बढ़ रही है। जांच एजेंसी तकनीकी और दस्तावेजी साक्ष्यों को भी खंगाल रही है। मंदिर परिसर, दानपात्रों और गिनती केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। इसके साथ ही बैंक खातों में जमा राशि, डिजिटल लेनदेन और अन्य रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। अब तक चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़े 60 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है। इनमें कर्मचारी, सेवादार और ट्रस्ट से जुड़े कई लोग शामिल हैं। कुछ लोगों को दोबारा बुलाया गया है, ताकि उनके बयानों की पुष्टि की जा सके। जांच एजेंसियों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्य पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री के दौरे से बढ़ी चर्चा, रिपोर्ट का इंतजार
जांच के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे ने इस मामले को और सुर्खियों में ला दिया है। तय कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन करेंगे। इसके अलावा वह जांच की प्रगति को लेकर अधिकारियों से जानकारी भी ले सकते हैं। इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पूरे मामले में अंतिम तस्वीर एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
