प्रयागराज के इलाहाबाद हाईकोर्ट में पिछले कई दिनों से चल रहे कानूनी सस्पेंस पर आज विराम लग गया। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को अदालत ने एक ऐसी राहत दी है, जिसकी उम्मीद उनके अनुयायी बेसब्री से कर रहे थे। जस्टिस जे.के. सिन्हा की बेंच ने स्पष्ट कर दिया है कि मार्च के तीसरे हफ्ते तक शंकराचार्य की गिरफ्तारी नहीं होगी। यह खबर आते ही कोर्ट परिसर में मौजूद समर्थकों ने राहत की सांस ली। चूंकि कल से होली की लंबी छुट्टियां शुरू हो रही हैं, ऐसे में यह आदेश शंकराचार्य के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं माना जा रहा है।
चैंबर में हुई 75 मिनट की जिरह: जब जज ने परखे केस के दस्तावेज
आज की सुनवाई सामान्य अदालती कार्यवाही से अलग रही। सुरक्षा और भीड़ को देखते हुए जज ने दोनों पक्षों के वकीलों को अपने चैंबर में बुलाया। बंद कमरे में हुई इस चर्चा के दौरान सरकारी वकीलों ने नाबालिगों के आरोपों को गंभीर बताते हुए गिरफ्तारी की मांग पर जोर दिया। वहीं, बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि यह मामला केवल धार्मिक द्वेष के कारण बनाया गया है। करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक चली इस बहस के बाद जज ने केस की गंभीरता को देखते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने माना कि इस मामले में अभी विस्तृत कानूनी विश्लेषण की जरूरत है, इसीलिए अंतिम फैसला मार्च के तीसरे सप्ताह के लिए टाल दिया गया है।
पुलिस की कार्रवाई पर लगा ‘स्टे’: अब मार्च में होगा फैसला
होली के रंग में नहीं पड़ेगा भंग: समर्थकों में जश्न का माहौल
इस फैसले के बाद अब यह तय हो गया है कि शंकराचार्य की होली किसी जेल की कोठरी में नहीं, बल्कि उनके मठ में अनुयायियों के साथ मनेगी। अगर आज कोर्ट से यह सुरक्षा नहीं मिलती, तो पुलिस के पास छुट्टियों के दौरान कार्रवाई करने का पूरा अधिकार होता। फिलहाल, अदालत ने मामले को ठंडे बस्ते में न डालकर इसे ‘रिजर्व’ रखा है, जिसका अर्थ है कि मार्च के तीसरे हफ्ते में आने वाला फैसला बेहद निर्णायक होगा। तब तक के लिए शंकराचार्य को मिली यह राहत उनके समर्थकों के लिए जीत की पहली सीढ़ी जैसी है।
