उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 के लिए फाइनल वोटर लिस्ट अब 15 अप्रैल को प्रकाशित होगी। पहले यह लिस्ट 6 फरवरी को आनी थी, लेकिन बाद में इसे 28 मार्च और अब दूसरी बार 15 अप्रैल कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया है कि इस बार वोटर लिस्ट बनाने, कंप्यूटर में डालने और सभी वोटर नंबर जारी करने का काम 13 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 15 अप्रैल को सभी लोगों के लिए अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है, इसलिए समय पर चुनाव करवाना अब बड़ी चुनौती बन गया है।
समय पर चुनाव की चुनौती
राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची का काम बहुत ध्यान से हो रहा है। इसके लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) किया जा रहा है। इसके अलावा स्कूल बोर्ड की परीक्षाएं और अन्य सरकारी कामों में प्रशासनिक मशीनरी व्यस्त है। ब्लॉक स्तर के अधिकारियों पर भी बहुत काम का दबाव है। इस वजह से वोटर लिस्ट का प्रकाशन समय से नहीं हो पाया। अब सवाल यह है कि क्या पंचायत चुनाव समय पर हो पाएंगे या देरी होगी।
पिछड़ा वर्ग आयोग और ओबीसी आरक्षण
यूपी पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग आयोग भी बहुत अहम है। यह आयोग ओबीसी आरक्षण के लिए ट्रिपल टेस्ट करता है। लेकिन अब तक इस आयोग का गठन नहीं हुआ है। अगर यह काम नहीं होता है, तो चुनाव में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में ग्राम पंचायतों में कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रशासक तैनात किए जा सकते हैं। इसके बाद अगले छह माह में ही चुनाव कराया जा सकेगा। इससे पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में अनिश्चितता बढ़ गई है।
वर्तमान में क्या है तैयारियां
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियां इस समय तेजी से पूरी नहीं हो रही हैं। ग्राम प्रधान का कार्यकाल 26 मई, ब्लॉक प्रमुख का 19 जुलाई और जिला परिषद अध्यक्ष का 11 जुलाई को खत्म हो रहा है। अगर फाइनल वोटर लिस्ट समय पर तैयार नहीं होती है और अन्य तैयारी पूरी नहीं होती है, तो चुनाव में देरी हो सकती है। इससे स्थानीय प्रशासन में अस्थिरता भी आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव समय पर करवाने के लिए आयोग को तेजी से काम करना होगा।
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