Bhadohi Name Change: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही जिले का नाम बदलकर संत रविदास नगर भदोही करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने भदोही में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह ऐलान किया। उनके बयान के बाद जिले के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भदोही देशभर में अपने कालीन उद्योग के लिए जाना जाता है। अब संत रविदास के नाम को जिले की पहचान से जोड़ने की घोषणा ने इस खबर को खास बना दिया है। हालांकि, नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया और सरकारी अधिसूचना की स्थिति की पुष्टि भी महत्वपूर्ण होगी।
1,340 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की सौगात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भदोही में आयोजित कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हुए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 112 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं को जिले के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान नाम बदलने की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री के इस दौरे में विकास कार्यों के साथ जिले की पहचान और स्थानीय उद्योग पर भी जोर रहा। अब इन परियोजनाओं के जरिए जिले में किन क्षेत्रों को फायदा मिलेगा, यह संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
इंडिया कारपेट एक्सपो के 50वें संस्करण का शुभारंभ
सीएम योगी भदोही में आयोजित ‘इंडिया कारपेट एक्सपो’ के स्वर्ण जयंती संस्करण में भी शामिल हुए। यह अंतरराष्ट्रीय हस्तनिर्मित कालीन व्यापार मेला अपने 50 वर्ष पूरे कर रहा है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और कालीन उद्योग से जुड़े निर्यातकों, विक्रेताओं तथा उद्यमियों से बातचीत की। उन्होंने कारीगरों के हुनर को आधुनिक तकनीक और नए डिजाइन से जोड़ने पर जोर दिया। भदोही का कालीन उद्योग स्थानीय लोगों की आजीविका और देश के निर्यात कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे आयोजनों से कारोबारियों को नए बाजारों और खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है।
कारीगरों के हुनर और जिले की पहचान पर जोर
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर भी कारपेट एक्सपो के आयोजन को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कालीन उद्योग से जुड़े लोगों को इस मेले की 50 वर्षों की यात्रा के लिए बधाई दी। उनका कहना था कि पारंपरिक हुनर को नई तकनीक और आधुनिक डिजाइन के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है। भदोही की पहचान लंबे समय से कालीन निर्माण से जुड़ी रही है, जबकि संत रविदास का नाम सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। ऐसे में जिले का नाम बदलने की घोषणा आने वाले समय में चर्चा का विषय बनी रह सकती है। फिलहाल, घोषणा के साथ-साथ इस बदलाव को लागू करने की आधिकारिक प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।
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