महाराष्ट्र सरकार बाल विवाह रोकने के लिए एक नया नियम लाने पर विचार कर रही है। इस नियम के तहत शादी के कार्ड पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि लिखना जरूरी किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे शादी करने वाले लड़के और लड़की की सही उम्र आसानी से पता चल सकेगी। अगर किसी की उम्र कानूनी सीमा से कम होगी तो समय रहते कार्रवाई कर शादी रोकी जा सकेगी। सरकार का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य नाबालिग बच्चों की शादी पर रोक लगाना और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना है।
दूसरे राज्य से मिला यह आइडिया
इस योजना को लेकर सरकार ने दूसरे राज्यों के अनुभवों का भी अध्ययन किया है। बताया जा रहा है कि राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था से अच्छे परिणाम मिले हैं। इसी वजह से महाराष्ट्र सरकार भी इस मॉडल को अपनाने पर विचार कर रही है। विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग ने बताया कि शादी के कार्ड पर जन्मतिथि लिखे जाने से उम्र की जांच आसान हो जाएगी और गलत जानकारी देने की संभावना कम होगी। इससे प्रशासन को भी समय रहते जानकारी मिल सकेगी।
प्रिंटिंग प्रेस और शादी हॉल की भी होगी जिम्मेदारी
सरकार केवल परिवारों को ही जिम्मेदार नहीं बनाना चाहती, बल्कि शादी के कार्ड छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस और शादी समारोह आयोजित करने वाले हॉल या मंगल कार्यालयों की भूमिका भी तय की जा सकती है। अगर कोई नियमों का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का मानना है कि जब शादी से जुड़े सभी लोग अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे तो बाल विवाह के मामलों को रोकना और आसान हो जाएगा। इससे कानून का पालन बेहतर तरीके से हो सकेगा।
बच्चों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की कोशिश
बाल विवाह आज भी कई जगहों पर एक बड़ी सामाजिक समस्या बना हुआ है। कम उम्र में शादी होने से बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और भविष्य पर बुरा असर पड़ता है। इसी को देखते हुए सरकार नए-नए उपायों पर काम कर रही है। शादी के कार्ड पर जन्मतिथि लिखने का प्रस्ताव भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अगर यह नियम लागू होता है तो बाल विवाह रोकने में मदद मिल सकती है और लोगों में जागरूकता भी बढ़ेगी। फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है।
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