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PM आवास ही क्यों पहुंचे राहुल और प्रियंका गांधी? रिहाई के बाद प्रियंका ने खोला बड़ा राज, बताई विरोध प्रदर्शन की असली वजह

PM आवास के बाहर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने विरोध प्रदर्शन क्यों किया? हिरासत से रिहा होने के बाद प्रियंका गांधी ने बताई असली वजह। छात्रों के मुद्दे, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और संसद में चर्चा की मांग पर पढ़ें पूरी खबर।

प्रियंका गांधी

प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद हिरासत से रिहा हुईं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने की कई बार कोशिश की, लेकिन चर्चा की अनुमति नहीं मिली। प्रदर्शन के लिए भी अनुमति नहीं दी गई, इसलिए विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर जाकर अपनी आवाज उठाने का फैसला किया। प्रियंका गांधी का कहना था कि यह प्रदर्शन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों की समस्याओं को देश के सामने रखने के उद्देश्य से किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है और जब छात्रों की बात नहीं सुनी जाती, तब उनका समर्थन करना जरूरी हो जाता है।

छात्रों के समर्थन में रखीं तीन प्रमुख मांगें

प्रियंका गांधी ने कहा कि कांग्रेस की मांगें पूरी तरह स्पष्ट हैं। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मामलों पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए और प्रभावित छात्रों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “इन्हीं बच्चों ने हमें संसद में भेजा है। संसद भी उनकी है और लोकतंत्र भी उनका है।” प्रियंका ने आरोप लगाया कि शिक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने शिक्षा बजट और सरकारी आर्थिक नीतियों का भी जिक्र करते हुए सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब लाखों छात्र भविष्य को लेकर परेशान हैं, तब सरकार को उनकी चिंताओं का जवाब देना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मौजूद रहे। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने आरोप लगाया कि देश में लगातार पेपर लीक की घटनाएं युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। दीपेंद्र हुड्डा ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों और नेताओं के साथ सख्ती की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है, जबकि देश के लाखों छात्र बेहतर और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

 पीएम आवास के बाहर धरने के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल

मंगलवार को संसद से मार्च निकालते हुए राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंच गए, जहां उन्होंने धरना शुरू कर दिया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने प्रदर्शनकारी नेताओं से बातचीत की। उनका कहना था कि संसद में चर्चा कराने की बात स्वीकार कर ली गई थी, लेकिन बाद में विपक्ष ने अपना रुख बदल लिया। बातचीत सफल नहीं होने के बाद पुलिस ने प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की। जब नेता वहां से नहीं हटे तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर अलग-अलग स्थानों पर पहुंचाया। कुछ घंटों बाद सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद शिक्षा, छात्रों के अधिकार और विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर प्रमुख रूप से उठने की संभावना जताई जा रही है।

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