पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बीच राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी कड़ी में शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों राज्यों में मौजूदा सरकारें फिर से सत्ता में वापसी करेंगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि Mamata Banerjee पश्चिम बंगाल में और M. K. Stalin तमिलनाडु में एक बार फिर मजबूत बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे। राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है, क्योंकि चुनाव के बीच इस तरह के दावे वोटरों के रुख को प्रभावित कर सकते हैं।
चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों पर उठाए सवाल
Sanjay Raut ने पश्चिम बंगाल में चल रही चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, जिससे ऐसा लग रहा है कि वोटर्स से ज्यादा पुलिस नजर आ रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव आयोग पर भी पक्षपात के आरोप लग रहे हैं और ऐसा महसूस हो रहा है जैसे वह निष्पक्ष संस्था न होकर किसी एक राजनीतिक दल के प्रभाव में काम कर रहा हो। राउत के इन आरोपों ने चुनावी निष्पक्षता पर नई बहस छेड़ दी है, हालांकि इस पर चुनाव आयोग या अन्य पक्षों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बीजेपी और केंद्र सरकार पर साधा निशाना
अपने बयान में Sanjay Raut ने Bharatiya Janata Party और केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कई कोशिशों के बावजूद विपक्षी नेताओं को कमजोर नहीं किया जा सका है। खास तौर पर उन्होंने Mamata Banerjee का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें हराने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन बंगाल की जनता उनके साथ खड़ी है। इसके साथ ही उन्होंने Amit Shah पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें अन्य राज्यों की बजाय अपने राज्यों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। राउत का यह बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकता है।
मतदान के आंकड़े और आगे की स्थिति
अगर मतदान की बात करें तो पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत बड़ी संख्या में सीटों पर वोटिंग जारी है, जबकि तमिलनाडु में एक ही चरण में सभी सीटों पर मतदान हो रहा है। दोपहर तक के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 60 प्रतिशत से अधिक और तमिलनाडु में 55 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है। यह दर्शाता है कि दोनों राज्यों में मतदाताओं में काफी उत्साह है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उच्च मतदान प्रतिशत चुनाव के परिणामों को दिलचस्प बना सकता है। फिलहाल सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन असली तस्वीर नतीजों के दिन ही साफ होगी।