US India Relations: अमेरिका और भारत के बीच रक्षा संबंधों को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के सामने राष्ट्रीय रक्षा रणनीति के अमल से जुड़ी जानकारी रखी गई है। इस प्रक्रिया में भारत के साथ रक्षा सहयोग को महत्वपूर्ण साझेदारी के तौर पर बताया गया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी ने भी भारत के साथ रणनीतिक और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की है। मार्च 2026 में भारत दौरे के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच सैन्य समन्वय, सूचना साझा करने और रक्षा तकनीक में सहयोग बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की थी।
10 साल के रक्षा फ्रेमवर्क से मजबूत हुए रिश्ते
भारत और अमेरिका ने अक्टूबर 2025 में 10 साल के रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लंबे समय तक आगे बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार करना है। इसमें सैन्य समन्वय, सूचनाओं के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और अलग-अलग क्षेत्रों में रक्षा साझेदारी बढ़ाने की दिशा शामिल है। अमेरिकी कांग्रेस से जुड़े शोध में भी इस समझौते को दोनों देशों के रक्षा संबंधों को व्यापक बनाने वाला कदम बताया गया है।
रक्षा के साथ समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत पर भी नजर
अमेरिका की रक्षा नीति में सहयोगी देशों के साथ जिम्मेदारियां साझा करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी संदर्भ में भारत के साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और रक्षा सहयोग को भी अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा से जुड़े सहयोग पहले से जारी हैं। हालांकि 2026 की मूल राष्ट्रीय रक्षा रणनीति में भारत और क्वाड का उल्लेख नहीं होने की बात विश्लेषणों में सामने आई थी, बाद की गतिविधियों में भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी पर अलग से जोर दिखाई देता है।
खास दवाओं पर भारत को अमेरिका से टैरिफ राहत
इसी बीच भारत के लिए अमेरिकी स्तर पर एक और महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के फेडरल रजिस्टर में भारत समेत 20 देशों को कुछ विशेष फार्मास्युटिकल उत्पादों और उनके संबंधित घटकों पर शून्य टैरिफ के लिए पात्र बताया गया है। इसमें दुर्लभ बीमारियों की दवाएं, न्यूक्लियर मेडिसिन, प्लाज्मा आधारित उपचार, फर्टिलिटी ड्रग्स, सेल और जीन थेरेपी तथा एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स जैसी श्रेणियां शामिल हैं। यह छूट सभी दवाओं पर लागू नहीं है और निर्धारित शर्तों के तहत ही मिलेगी। जेनेरिक दवाएं फिलहाल इस विशेष सेक्शन 232 टैरिफ के दायरे में नहीं हैं।
