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चुनाव वोटिंग से पहले CRPF पर TMC का गंभीर आरोप, कहा- ‘BJP के पर्चे बांट रहे हैं जवान…’

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 से पहले TMC ने CRPF पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों चुनाव आयोग से मांगी गई सख्त कार्रवाई।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) पर गंभीर आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखा है। TMC नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी ज्ञानेश कुमार को भेजे गए पत्र में दावा किया है कि कुछ वीडियो में CRPF जवानों को कथित तौर पर भाजपा उम्मीदवारों के साथ देखा गया है। इस वीडियो को आधार बनाकर पार्टी ने आरोप लगाया है कि चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो रही है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

वीडियो को लेकर TMC का दावा और कानूनी उल्लंघन का आरोप

टीएमसी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक पर वायरल एक वीडियो में यह देखा गया कि कुछ नागरिकों का दावा है कि CRPF के जवान भाजपा उम्मीदवारों के साथ घूम रहे हैं और उनके लिए पर्चे भी बांट रहे हैं। इसके अलावा आरोप है कि मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। TMC ने इसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और भारतीय न्याय संहिता 2023 का उल्लंघन बताया है। पार्टी का कहना है कि यह आचरण चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है और इसे गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।

मतदाताओं पर प्रभाव और निष्पक्ष चुनाव की मांग

टीएमसी ने आरोप लगाया है कि इस तरह की गतिविधियां मतदाताओं के बीच डर और दबाव का माहौल पैदा कर सकती हैं, जिससे स्वतंत्र मतदान प्रभावित होता है। पार्टी ने यह भी कहा है कि चुनाव ड्यूटी पर तैनात किसी भी केंद्रीय बल का राजनीतिक रूप से निष्पक्ष रहना अनिवार्य है। पत्र में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 और 129 का भी हवाला दिया गया है, जिसमें स्पष्ट है कि किसी भी सुरक्षा बल के सदस्य को मतदाताओं को प्रभावित करने या किसी पार्टी के पक्ष में प्रचार करने की अनुमति नहीं होती। टीएमसी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।

TMC की मांग और चुनाव आयोग से कार्रवाई की अपील

इस पूरे मामले में टीएमसी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि संबंधित सीआरपीएफ कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही एफआईआर दर्ज करने और सभी केंद्रीय बलों को चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कराने की भी मांग की गई है। वहीं, इस आरोप के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है और अब सबकी नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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