आज के दौर में जहां लोग ज्यादा कमाई और बेहतर लाइफस्टाइल को सफलता का पैमाना मानते हैं, वहीं एक महिला का फैसला इस सोच को चुनौती देता नजर आ रहा है। करीब 14 साल तक कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करने के बाद, हर महीने लगभग 5 लाख रुपये कमाने वाली जॉयेटा नाम की महिला ने अपनी नौकरी छोड़ दी। यह कोई छोटा फैसला नहीं था, क्योंकि इतनी बड़ी सैलरी और स्थिर करियर छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन जॉयेटा के मुताबिक, बाहरी तौर पर शानदार दिखने वाली यह नौकरी अंदर से उन्हें थका रही थी और उन्हें वह संतोष नहीं दे रही थी, जिसकी उन्हें तलाश थी।
‘गोल्डन केज’ क्यों लगा करियर?
जॉयेटा ने अपने अनुभव को ‘गोल्डन केज’ यानी ‘सुनहरा पिंजरा’ बताया। उनका कहना है कि इस नौकरी ने उन्हें महंगी जिंदगी जरूर दी—जैसे विदेश यात्राएं, ब्रांडेड चीजें और आरामदायक जीवनशैली—लेकिन इसके बदले उन्हें हर समय काम के लिए उपलब्ध रहना पड़ता था। काम का दबाव इतना ज्यादा था कि निजी जिंदगी लगभग खत्म हो चुकी थी। उन्होंने साफ कहा कि यह सैलरी उन्हें वह जिंदगी दे रही थी, जो वह असल में चाहती ही नहीं थीं। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि पैसा होने के बावजूद वे अंदर से खुश नहीं हैं।
लाइफस्टाइल इंफ्लेशन का जाल
जॉयेटा ने अपनी कहानी में ‘लाइफस्टाइल इंफ्लेशन’ को सबसे बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि जैसे-जैसे इंसान की कमाई बढ़ती है, वैसे-वैसे उसके खर्च और जरूरतें भी बढ़ जाती हैं। इस वजह से वह उसी नौकरी में फंसा रह जाता है, जो उसे मानसिक रूप से थका रही होती है। उन्होंने बताया कि वे धीरे-धीरे समझने लगी थीं कि वे स्टेटस और दिखावे के पीछे भाग रही हैं, जबकि असल में वही चीजें उन्हें और ज्यादा बांध रही थीं। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया, लेकिन उससे पहले अपनी सभी आर्थिक जिम्मेदारियों जैसे EMI को खत्म कर लिया, ताकि भविष्य में कोई दबाव न रहे।
नए रास्ते पर मिली असली संतुष्टि
नौकरी छोड़ने के बाद जॉयेटा ने एक नया रास्ता चुना और अब वह प्रोजेक्ट बेस्ड काम करती हैं, जिसे ‘फ्रैक्शनल CMO’ कहा जाता है। इसमें वह फुल-टाइम काम करने के बजाय जरूरत के अनुसार प्रोजेक्ट्स लेती हैं। उनका कहना है कि अब उनकी आय पहले से कम जरूर है, लेकिन उन्हें अपने समय और जीवन पर ज्यादा नियंत्रण मिला है, जिससे उन्हें असली खुशी मिल रही है। सोशल मीडिया पर उनकी इस कहानी को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे साहसिक कदम मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि हर व्यक्ति की प्राथमिकताएं अलग होती हैं। हालांकि, इस कहानी ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सिर्फ पैसा ही खुशी की गारंटी दे सकता है?
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