दुष्कर्म के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से एक बार फिर राहत मिली है। जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी अंतरिम जमानत को 25 मई तक बढ़ा दिया है। यह फैसला उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अदालत ने माना कि उम्र और बीमारियों के कारण उन्हें फिलहाल इलाज की जरूरत है, जिसके चलते उन्हें अस्थायी रूप से जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई है। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है।
जमानत बढ़ाने के लिए दी गई दलीलें
आसाराम की ओर से हाईकोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें उनकी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि वह लंबे समय से जेल में बंद हैं और उनकी उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है। साथ ही, उन्हें कई गंभीर बीमारियां भी हैं, जिनका इलाज जेल के बाहर बेहतर तरीके से संभव है। इन तर्कों को सुनने के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जमानत की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया। अदालत ने इस दौरान यह भी ध्यान रखा कि यह राहत केवल इलाज के उद्देश्य से दी जा रही है।
पहले भी मिल चुकी है अंतरिम जमानत
यह पहला मौका नहीं है जब आसाराम को स्वास्थ्य कारणों के आधार पर राहत मिली हो। इससे पहले भी उन्हें समय-समय पर अंतरिम जमानत दी जा चुकी है। जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीन महीने की अंतरिम जमानत दी थी, जिसे बाद में बढ़ाया गया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उन्हें छह महीने के लिए और राहत दी गई थी ताकि वह अपना इलाज जारी रख सकें। हालांकि हर बार अदालत ने उनके ऊपर सख्त शर्तें लगाई हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है।
शर्तों के साथ मिली छूट
अदालत द्वारा दी गई अंतरिम जमानत के साथ कई शर्तें भी जुड़ी होती हैं। इनमें यह शामिल है कि वह किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे, भीड़ एकत्रित नहीं करेंगे और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएंगे। साथ ही उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वह केवल इलाज के उद्देश्य से ही बाहर रहें। अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद उन्हें 25 मई तक राहत मिल गई है। इस बीच आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित फैसलों पर सभी की नजर बनी हुई है, जिससे यह तय होगा कि उन्हें आगे और राहत मिलती है या नहीं।