आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) परिसर से एक बेहद ही दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के एमएससी सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से पूरे देश के शैक्षणिक संस्थानों में हलचल मच गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, साहिल को परीक्षा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) यानी ChatGPT का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। संस्थान का कहना है कि उसे केवल समझाया गया था और कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी, लेकिन इस घटना के कुछ ही घंटों बाद साहिल ने जो कदम उठाया, उसने सभी को सकते में डाल दिया है।
परिवार के गंभीर आरोप: प्रोफेसर पर टॉर्चर और जातिसूचक टिप्पणियों का दावा
साहिल की अचानक हुई मौत के बाद उनके परिवार ने संस्थान और एक प्रोफेसर पर बहुत गंभीर आरोप लगाए हैं। साहिल के पिता ने एक प्रोफेसर का नाम लेते हुए सीधे तौर पर मानसिक प्रताड़ना और जातिसूचक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है, और आरोपी प्रोफेसर की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की है। वहीं, साहिल की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका बेटा पिछले तीन महीनों से लगातार मानसिक तनाव से गुजर रहा था और उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। मां ने अफसोस जताते हुए कहा कि उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल यह थी कि वे अपने प्रतिभाशाली बेटे को पढ़ाने के लिए इस संस्थान में लेकर आए थे, वरना आज उनका बेटा उनके बीच जिंदा होता।
आईआईटी बॉम्बे प्रशासन की सफाई और छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन
इस पूरे मामले पर सफाई देते हुए आईआईटी बॉम्बे प्रबंधन ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। संस्थान का पक्ष है कि छात्र को मोबाइल फोन के जरिए चैटजीपीटी का उपयोग करते पकड़ा जरूर गया था, परंतु विभाग के प्रमुख और संबंधित शिक्षक ने उसे यह भरोसा दिलाया था कि इस छोटी सी घटना का उसके भविष्य या अकादमिक करियर पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, संस्थान के इस बयान से छात्र संतुष्ट नहीं हैं। सैकड़ों की संख्या में छात्रों ने कैंपस के अंदर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है और साहिल को एक साल के लिए सस्पेंड करने की धमकी दी गई थी, जिससे वह भारी डिप्रेशन में आ गया था।
न्याय की गुहार और पुलिस जांच: क्या सामने आ पाएगा पूरा सच?
इस दर्दनाक हादसे के बाद अब पीड़ित परिवार को पुलिस और देश की न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। माता-पिता अपने होनहार बेटे के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में किसी अन्य छात्र को ऐसी मानसिक प्रताड़ना का सामना न करना पड़े। स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है और हॉस्टल के साथियों तथा फैकल्टी मेंबर से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। यह घटना एक बार फिर देश के बड़े शिक्षण संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, प्रशासनिक दबाव और अकादमिक तनाव जैसे गंभीर मुद्दों को देश के सामने ला खड़ा किया है, जिस पर अब खुलकर बहस होने लगी है।
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