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सरकार बने अभी दो दिन ही हुए थे, मंत्रियों की नाराजगी ने बढ़ाई CM शिवकुमार की टेंशन

कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की नई सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। केएच मुनियप्पा ने विभाग बदलने की मांग की है,

शिवकुमार

कर्नाटक में नई सरकार के गठन के बाद अब मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष की खबरें सामने आने लगी हैं। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली सरकार को शपथ लिए अभी कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन कैबिनेट के भीतर उठ रही नाराजगी ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने खुले तौर पर अपने विभाग में बदलाव की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि उन्हें ऐसा विभाग दिया जाना चाहिए जहां वे अपने लंबे राजनीतिक अनुभव का बेहतर उपयोग कर सकें। इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में यह सवाल उठने लगा है कि क्या नई सरकार के भीतर सब कुछ सामान्य है या फिर विभागों को लेकर नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

मुनियप्पा ने नेतृत्व के सामने रखी मांग

केएच मुनियप्पा ने साफ कहा है कि उन्होंने अपने विभाग को बदलने का अनुरोध पार्टी नेतृत्व के सामने रखा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जब राहुल गांधी कर्नाटक दौरे पर आए थे, तब भी उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर की थी। मुनियप्पा का मानना है कि वरिष्ठ नेताओं को उनकी योग्यता, अनुभव और राजनीतिक योगदान के आधार पर महत्वपूर्ण विभाग दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें समाज कल्याण, कृषि या सिंचाई जैसे विभागों की जिम्मेदारी दी जाती है तो वे जनता के लिए अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे। मुनियप्पा ने यह भी याद दिलाया कि वे पिछले तीन वर्षों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग संभाल रहे हैं और अब नई जिम्मेदारी लेना चाहते हैं। उनके इस बयान को सरकार के भीतर असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी ने बढ़ाया दबाव

मुनियप्पा से पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी भी अपने विभाग को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। जानकारी के अनुसार रेड्डी को उम्मीद थी कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग की जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का मंत्रालय सौंप दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपनी नाराजगी पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज हुई कि विभागों के आवंटन को लेकर कई नेताओं की अपेक्षाएं पूरी नहीं हो सकीं। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व सार्वजनिक रूप से किसी बड़े विवाद से इनकार कर रहा है, लेकिन लगातार सामने आ रहे बयान यह संकेत दे रहे हैं कि कैबिनेट के भीतर विभागों को लेकर संतुष्टि का स्तर समान नहीं है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं और इसे आंतरिक असंतोष का उदाहरण बता रहे हैं।

CM शिवकुमार ने दिया भरोसा, समाधान की बात कही

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंत्रियों की नाराजगी को गंभीर संकट मानने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि रामलिंगा रेड्डी उनके पुराने सहयोगी और सम्मानित नेता हैं तथा उनकी चिंताओं का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाल लिया जाएगा। शिवकुमार ने बताया कि रेड्डी की मुख्य आपत्ति उनके विभाग की कार्यप्रणाली और लगातार यात्रा से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सभी नेताओं से चर्चा कर ऐसा रास्ता निकाला जाएगा जिससे सरकार और संगठन दोनों मजबूत बने रहें। वहीं, मुनियप्पा द्वारा भी राहुल गांधी और सोनिया गांधी से इस विषय पर बातचीत करने की बात कहे जाने के बाद यह मुद्दा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व नाराज नेताओं को कैसे संतुष्ट करता है और क्या आने वाले दिनों में विभागों में कोई बदलाव देखने को मिलता है। फिलहाल, नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मंत्रियों के बीच संतुलन बनाए रखने की नजर आ रही है।

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