रविवार की तड़के जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब मध्य पूर्व के आसमान में आग के गोलों ने एक नई जंग की इबारत लिख दी। ईरान ने अपने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ के तहत इजरायल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले शहर डिमोना को निशाना बनाया। डिमोना महज एक शहर नहीं, बल्कि इजरायल की परमाणु शक्ति का केंद्र है। ईरानी मिसाइलों ने न केवल इजरायल की सीमाओं को लांघा, बल्कि उसके अभेद्य माने जाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम को भी धता बता दिया। स्थानीय चश्मदीदों के अनुसार, धमाके इतने जोरदार थे कि कई किलोमीटर दूर तक धरती कांप उठी। इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने स्वीकार किया है कि इस बार उनका सुरक्षा घेरा पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हुआ, जिससे मिसाइलें सीधे रिहायशी इलाकों और सैन्य ठिकानों के पास गिरीं।
नतांज का बदला या महायुद्ध का आगाज? ईरान का बड़ा दावा
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे ‘ऐतिहासिक प्रतिशोध’ करार दिया है। ईरान का कहना है कि यह हमला शनिवार सुबह नतांज परमाणु केंद्र पर हुए हमले का सीधा जवाब है। ईरान ने दावा किया है कि इस स्ट्राइक में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और इजरायल के कई सामरिक ठिकाने जमींदोज हो गए हैं। तेहरान की गलियों में इस हमले के बाद जश्न का माहौल है और वहां के सैन्य कमांडरों का कहना है कि अब जंग का समीकरण बदल चुका है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उसके परमाणु ठिकानों पर कोई भी आंच आएगी, तो वह इजरायल के हृदय स्थल पर वार करने से पीछे नहीं हटेगा। इस हमले ने यह साबित कर दिया है कि अब मिसाइल तकनीक के मामले में ईरान ने अपनी पहुंच काफी घातक बना ली है।
क्या सच में परमाणु प्लांट को हुआ नुकसान?
हमले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या डिमोना स्थित ‘शिमोन पेरेस नेगेव न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर’ सुरक्षित है? अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक किसी भी तरह के रेडियोधर्मी रिसाव के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन शहर के भीतर भारी तबाही हुई है। इजरायल की मेडिकल एजेंसी ‘मैगन डेविड एडोम’ ने पुष्टि की है कि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। अराद और डिमोना के अस्पतालों में इमरजेंसी घोषित कर दी गई है। मलबे के ढेर में दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। इजरायल के भीतर इस विफलता को लेकर सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दुनिया का सबसे आधुनिक डिफेंस सिस्टम ‘आयरन डोम’ और ‘एरो’ इस बार क्यों चुप रह गए?
खतरे में दुनिया की शांति
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस रात को देश के इतिहास की ‘सबसे कठिन रातों में से एक’ बताया है। उन्होंने एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई है और संकेत दिए हैं कि ईरान को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। जानकारों का मानना है कि यह हमला मध्य पूर्व को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है, जहां से वापसी का रास्ता केवल महायुद्ध की ओर जाता है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है, लेकिन युद्ध की चिंगारी अब शोला बन चुकी है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट ने संकेत दे दिए हैं कि यह तनाव केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। अब दुनिया की नजरें इजरायल के अगले कदम पर टिकी हैं—क्या इजरायल सीधे ईरान की राजधानी तेहरान को निशाना बनाएगा?
