संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत से ठीक पहले देश की सियासत में एक नया उबाल आ गया है। सरकार द्वारा बुलाई गई पारंपरिक सर्वदलीय बैठक में उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब विपक्ष के तमाम दिग्गज नेता अचानक बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल आए। अमूमन शांतिपूर्ण और रणनीतिक मानी जाने वाली इस बैठक में माहौल तब गरमा गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पार्टी के ही कुछ बागी सांसदों को भी आमंत्रित कर लिया गया। सरकार के इस अप्रत्याशित कदम ने विपक्षी खेमे को इस कदर नाराज कर दिया कि उन्होंने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए तुरंत विरोध दर्ज कराया।
TMC की लिस्ट में बागी चेहरे: महुआ मोइत्रा ने सरकार को क्यों घेरा?
बैठक के भीतर का माहौल तब पूरी तरह बदल गया जब उपस्थिति सूची में आधिकारिक TMC सांसदों से पहले बागी सांसदों के नाम दर्ज पाए गए। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तृणमूल कांग्रेस की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने सरकार के रुख पर तीखे बाण चलाए। महुआ मोइत्रा ने सीधे तौर पर सवाल दागते हुए कहा कि जो लोग तकनीकी या व्यावहारिक रूप से पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं, उन्हें सर्वदलीय बैठक जैसे गंभीर मंच पर किस हैसियत से आमंत्रित किया गया है? उन्होंने सरकार की इस कार्रवाई को संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह एक बेहद गलत और खतरनाक परिपाटी की शुरुआत है, जिसका पुरजोर विरोध किया जाना जरूरी है।
एकजुट विपक्ष का प्रतीकात्मक वॉकआउट: प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर वार
इस मुद्दे पर केवल TMC ही नहीं, बल्कि पूरा विपक्ष एक सुर में खड़ा दिखाई दिया। सरकार के इस कदम को अलोकतांत्रिक बताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले सहित कई प्रमुख विपक्षी चेहरे एकजुट होकर बैठक से बाहर आ गए। इसे विपक्ष ने एक ‘प्रतीकात्मक वॉकआउट’ (Symbolic Walkout) करार दिया। संसद परिसर के बाहर आकर इन नेताओं ने तुरंत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और मीडिया के सामने सरकार की इस रणनीति की जमकर आलोचना की। सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आधिकारिक सूची में बागी नेताओं को तरजीह देना विपक्ष को कमजोर करने और उनका अपमान करने की सोची-समझी कोशिश है।
नाराजगी के बाद यू-टर्न: प्रेस वार्ता के बाद फिर बैठक में लौटे विपक्षी नेता
हालांकि, इस पूरे सियासी ड्रामे का अंत केवल वॉकआउट पर ही नहीं हुआ। मीडिया के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने और सरकार की घेराबंदी करने के बाद विपक्षी दलों ने एक परिपक्व राजनीतिक सूझबूझ का परिचय भी दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के तुरंत बाद, देश और जनता से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए सभी विपक्षी नेता दोबारा सर्वदलीय बैठक के हॉल में वापस लौट गए। विपक्ष का कहना था कि वे सरकार की गलत नीतियों का विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ संसद सत्र को सुचारू रूप से चलाने और जनता की आवाज उठाने के अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेंगे। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि आगामी मानसून सत्र बेहद हंगामेदार होने वाला है।
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