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पर्शियन गल्फ में बढ़ा तनाव… क्या भारत भेजेगा नौसेना? हजारों नाविक और कई भारतीय जहाज फंसे, सरकार जल्द ले सकती है बड़ा फैसला

पर्शियन गल्फ में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार भारतीय नौसेना को तैनात करने पर विचार कर रही है। हजारों नाविक और कई भारतीय जहाज फंसे होने की आशंका के बीच जानिए क्या है पूरी स्थिति और भारत की तैयारी।

पर्शियन गल्फ

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz के आसपास बने हालात ने भारत के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार इस समुद्री रास्ते के पास कई व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय जहाज और भारतीय नाविक भी शामिल हैं। ऐसे में भारत सरकार पर्शियन गल्फ क्षेत्र में फंसे जहाजों की सुरक्षा के लिए Indian Navy को तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगले एक-दो दिनों में इस संबंध में बड़ा फैसला लिया जा सकता है। अगर यह निर्णय लिया जाता है तो भारतीय नौसेना के युद्धपोत पर्शियन गल्फ में मौजूद जहाजों को सुरक्षा प्रदान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित रास्ते से बाहर निकालने में मदद करेंगे। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इस समुद्री क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल सप्लाई गुजरती है और किसी भी तरह का संकट वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

हजारों नाविक और कई भारतीय जहाज फंसे होने की आशंका

शिपिंग उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार पर्शियन गल्फ में फंसे जहाजों में कई तेल टैंकर और गैस ले जाने वाले बड़े जहाज शामिल हैं। इनमें से लगभग 10 प्रतिशत जहाज भारत से जुड़े बताए जा रहे हैं। इन जहाजों में Shipping Corporation of India के कुछ जहाज भी शामिल बताए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इन जहाजों की कुल माल ढोने की क्षमता आठ लाख टन से ज्यादा है, जो लाखों बैरल तेल के बराबर मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों का अनुमान है कि इस समय पर्शियन गल्फ क्षेत्र में फंसे जहाजों पर करीब 20 हजार नाविक मौजूद हो सकते हैं। चूंकि भारत दुनिया में नाविकों की बड़ी आपूर्ति करने वाला देश है, इसलिए यह संभावना भी जताई जा रही है कि इन नाविकों में बड़ी संख्या भारतीयों की हो सकती है। यही वजह है कि भारत सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां कर रही है।

पहले भी चलाया जा चुका है ‘ऑपरेशन संकल्प’

समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत पहले भी कई अहम अभियान चला चुका है। इनमें सबसे प्रमुख अभियान Operation Sankalp रहा है। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय नौसेना ने खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा प्रदान की थी और उन्हें सुरक्षित रास्ता दिखाया था। उस समय क्षेत्र में सक्रिय समुद्री डाकुओं और सशस्त्र समूहों से जहाजों को खतरा था। भारतीय नौसेना ने कई जहाजों को सुरक्षित पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई थी। मौजूदा हालात में भी उसी तरह की रणनीति अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इस बीच क्षेत्रीय तनाव को लेकर Masoud Pezeshkian की ओर से भी बयान आया है, जिसमें कहा गया कि जब तक पड़ोसी देश पहले हमला नहीं करते, तब तक ईरान किसी देश पर हमला नहीं करेगा। इस बयान से कुछ हद तक उम्मीद जताई जा रही है कि समुद्री रास्तों पर तनाव कम हो सकता है और फंसे जहाज आगे बढ़ सकेंगे।

तेल आपूर्ति और बंदरगाहों के लिए भारत की नई तैयारी

पश्चिम एशिया में बने हालात को देखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत अब अपने करीब 70 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति ऐसे रास्तों से सुनिश्चित कर रहा है जिन्हें होरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ती। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर अचानक दबाव पड़ने की संभावना कम हो जाती है। दूसरी ओर Ministry of Ports, Shipping and Waterways ने भारतीय बंदरगाहों के लिए नई मानक कार्यप्रणाली जारी की है। इसके तहत भारतीय बंदरगाहों को यह अनुमति दी गई है कि वे पश्चिम एशिया जाने वाले माल को अस्थायी रूप से अपने यहां स्टोर कर सकें। साथ ही बंदरगाहों पर विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी जो इस संकट की स्थिति में शिपिंग से जुड़े फैसले तेजी से ले सकें। सरकार का मानना है कि इन कदमों से समुद्री व्यापार पर पड़ने वाले असर को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और शिपिंग कंपनियों को भी राहत मिलेगी।

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