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सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी: ‘प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज से बचें, पहले जांच करें’, 8 राज्यों को नोटिस

दिल्ली जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 8 राज्यों को नोटिस जारी। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- जांच हो पर फिलहाल एक्शन न लें।

सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंच गया है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस संवेदनशील मामले पर हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए उत्तर प्रदेश समेत देश के आठ प्रमुख राज्यों को नोटिस जारी किया है और पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन फिलहाल कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

आखिर कैसे भड़की हिंसा और क्या बोले सीजेआई?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस पूरी घटना की गहराई से समीक्षा की। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि शुरुआत में आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन अचानक एक दिन स्थिति बिगड़ गई और हिंसा भड़क उठी। इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण हो सकते हैं—पहला यह कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा सख्ती और बल प्रयोग कर दिया, या फिर दूसरा कारण यह हो सकता है कि प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ ऐसे उपद्रवी तत्व शामिल हो गए थे जो जानबूझकर माहौल खराब करना चाहते थे। कोर्ट का मानना है कि जब भीड़ नियंत्रण के लिए एक कड़क और स्पष्ट प्रोटोकॉल तैयार हो जाएगा, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं के लिए जवाबदेही तय करना काफी आसान हो जाएगा।

याचिकाकर्ता के गंभीर आरोप और एसआईटी गठन की मांग

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य रखे। उन्होंने दलील दी कि यदि कुछ लोग उग्र हो भी गए थे, तो पुलिस के पास कानूनी कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने का विकल्प था, लेकिन बल प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए था। वकील ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कई ऐसे पुलिसकर्मी भी देखे गए जो सादे कपड़ों (बिना यूनिफॉर्म) में थे और हाथों में हथियार लेकर लोगों पर बल प्रयोग कर रहे थे। इसके अलावा, कोर्ट से मांग की गई कि पूर्व चीफ जस्टिस की निगरानी में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाना चाहिए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके। साथ ही, प्रदर्शनकारियों की डिजिटल टेक्नोलॉजी के जरिए पहचान करके उनकी तस्वीरें या जानकारियां सार्वजनिक करने पर रोक लगाने की भी मांग उठाई गई, क्योंकि इसमें कई छात्र और नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं।

बिहार में बच्चों की गिरफ्तारी और जुनैद का मामला भी गूंजा

इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान देश के अन्य हिस्सों से जुड़े मामले भी सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए। एक वकील ने बिहार में हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कोर्ट को बताया कि वहां पुलिस ने कार्रवाई के दौरान नाबालिगों, यहाँ तक कि 13 साल तक के छोटे बच्चों को भी हिरासत में ले लिया है। वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी सुनवाई के दौरान जुनैद से जुड़ा मामला उठाते हुए दावा किया कि उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित किया जा रहा है। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह एक बिल्कुल अलग मसला है। इन तमाम दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और गुजरात समेत आठ राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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