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रिलीज से पहले ‘यादव जी की लव स्टोरी’ पर बवाल! कलेक्ट्रेट में गरजा यादव समाज, दूध से स्नान कर जताया विरोध

यादव जी की लव स्टोरी

फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ की रिलीज से पहले ही विवाद गहरा गया है। 27 जून को प्रस्तावित रिलीज से पहले यादव समाज के लोगों ने जोरदार प्रदर्शन कर फिल्म पर रोक लगाने की मांग की। यादव स्वाभिमान शक्ति संगठन के बैनर तले कलेक्ट्रेट परिसर में जुटे पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि फिल्म के कुछ दृश्य और संवाद समाज की छवि को गलत ढंग से पेश करते हैं, जिससे सामाजिक सम्मान को ठेस पहुंच रही है। विरोध के दौरान सरजू पांडेय पार्क में प्रतीकात्मक रूप से दूध से स्नान कर आक्रोश जताया गया।

-‘समाज की छवि से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’ – कलेक्ट्रेट में सौंपा ज्ञापन

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि हाल के दिनों में फिल्म का प्रचार-प्रसार तेज हुआ है और ट्रेलर व प्रचार सामग्री देखकर उन्हें आपत्ति हुई। संगठन के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में मांग की कि फिल्म की रिलीज से पहले उसके कंटेंट की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी भी समाज विशेष को गलत, आपत्तिजनक या भ्रामक रूप में दिखाया जाता है, तो यह न सिर्फ उस समुदाय की भावनाओं को आहत करता है बल्कि सामाजिक सद्भाव पर भी असर डाल सकता है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे दिनेश सिंह यादव ने कहा कि किसी भी रचनात्मक अभिव्यक्ति का स्वागत है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी सम्मानित समाज की छवि को धूमिल करना उचित नहीं। उन्होंने प्रशासन से सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समय रहते मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो संगठन आगे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।

दूध से स्नान कर जताया प्रतीकात्मक विरोध, सामाजिक सौहार्द का दिया हवाला

विरोध प्रदर्शन के दौरान सरजू पांडेय पार्क में कार्यकर्ताओं ने दूध से स्नान कर प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह कदम समाज की “पवित्र छवि” को बचाने के संकल्प का प्रतीक है। उनका तर्क है कि फिल्मों का प्रभाव व्यापक होता है और यदि किसी वर्ग को गलत रूप में दिखाया जाए तो उसका असर आने वाली पीढ़ियों तक पड़ सकता है।

समाजसेवी जरनैल यादव ने कहा कि मनोरंजन के नाम पर किसी समुदाय की नकारात्मक या अतिरंजित तस्वीर पेश करना निंदनीय है। उन्होंने कहा कि कला और सिनेमा समाज का दर्पण होते हैं, इसलिए निर्माताओं को जिम्मेदारी के साथ विषय का चयन करना चाहिए। स्वामी सहजानंद के पूर्व अध्यक्ष संदीप यादव ने भी प्रशासन से आग्रह किया कि शासन स्तर पर हस्तक्षेप कर मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए, अन्यथा कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

प्रशासन पर टिकी निगाहें, रिलीज से पहले बढ़ सकता है विवाद

फिलहाल प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की समीक्षा का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले संबंधित पक्षों की बात सुनी जाएगी और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की जाएगी। उधर, संगठन के अन्य पदाधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी प्रदर्शन में शामिल रहे और एकजुटता दिखाते हुए फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग दोहराई।

ऐसे विवादों में संतुलन बेहद जरूरी होता है—एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, तो दूसरी ओर समाज की भावनाएं। यदि दोनों पक्ष संवाद के माध्यम से समाधान निकालें तो स्थिति शांतिपूर्ण रह सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन क्या कदम उठाता है और फिल्म निर्माता इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, ‘यादव जी की लव स्टोरी’ की रिलीज से पहले ही यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बन चुका है।

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