झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर INDIA गठबंधन के भीतर बड़ा तनाव खुलकर सामने आ गया है। मामला तब गरमा गया जब कांग्रेस ने झारखंड में एक राज्यसभा सीट के लिए अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया, जबकि इस पर गठबंधन स्तर पर अंतिम सहमति नहीं बनी थी। इस कदम के बाद सत्ता गठबंधन में शामिल दलों के बीच भरोसे की खाई गहरी होती दिख रही है और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
इस घटनाक्रम के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए आपात बैठक बुलाई, जिसमें पार्टी के सभी विधायक और मंत्री शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य राज्यसभा चुनाव में आगे की रणनीति तय करना और कांग्रेस के कदम पर साझा रुख तैयार करना बताया गया।
सहमति के बिना फैसले से बढ़ा टकराव
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस की ओर से अपने प्रत्याशी की घोषणा ऐसे समय में की गई जब गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और उम्मीदवारों पर अंतिम चर्चा चल रही थी। इसी बीच कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़े एक नाम को राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में आगे कर दिया, जिससे राजनीतिक असंतोष पैदा हो गया।
मुख्यमंत्री और JMM नेतृत्व की ओर से पहले यह संकेत दिया गया था कि 5 जून को संयुक्त रूप से अंतिम फैसला लिया जाएगा, लेकिन उससे पहले ही कांग्रेस ने अपना फैसला सार्वजनिक कर दिया। इस कदम को JMM की ओर से गठबंधन अनुशासन के खिलाफ माना जा रहा है, जिससे दोनों दलों के बीच तनाव बढ़ गया है।
बैठक के बाद JMM नेताओं ने संकेत दिया कि पार्टी अपने उम्मीदवारों को उतारने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है और अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष द्वारा लिया जाएगा।
विधायकों का गणित और बदलता राजनीतिक समीकरण
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए संख्या गणित निर्णायक भूमिका निभाता है। मौजूदा समीकरण के अनुसार, सत्ताधारी गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है, लेकिन अंदरूनी मतभेद इस बढ़त को जटिल बना रहे हैं। कांग्रेस के पास लगभग 16 विधायक हैं, जबकि बहुमत के लिए 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होती है।
इसी बीच गठबंधन में शामिल अन्य दलों—जैसे राजद और वाम दल—की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो जाती है। दूसरी ओर विपक्षी खेमे में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और यह संभावना जताई जा रही है कि क्रॉस वोटिंग या द्वितीय वरीयता वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की रणनीति और फैसले पर सबकी नजर
ताजा घटनाक्रम के बाद अब सभी की नजरें झारखंड मुक्ति मोर्चा के शीर्ष नेतृत्व पर टिक गई हैं कि वह अंतिम रूप से क्या फैसला लेता है। पार्टी के केंद्रीय महासचिवों ने संकेत दिया है कि विधायकों और मंत्रियों की राय ली गई है और अंतिम निर्णय पार्टी अध्यक्ष की मंजूरी के बाद सामने आएगा।
इधर कांग्रेस अपने फैसले पर कायम दिख रही है, जबकि JMM अब अपने उम्मीदवार उतारने पर गंभीर विचार कर रही है। इससे यह साफ है कि राज्यसभा चुनाव अब केवल औपचारिक मुकाबला नहीं रह गया है, बल्कि यह INDIA गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व विश्वास की परीक्षा बन गया है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के बाद राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
Read more-एक विकेट की कीमत 4.5 करोड़ रुपये! जसप्रीत बुमराह के सीजन का रिपोर्ट कार्ड देखकर फैंस हैरान
