Bharat Tiwari Case: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। लगातार विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार ने इस मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया है। बुधवार को कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई और औपचारिक अधिसूचना भी जारी कर दी गई। इस जांच की जिम्मेदारी पटना हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा को सौंपी गई है। वे पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करेंगे और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे।
फर्जी एनकाउंटर का आरोप
इस पूरे मामले में परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि घटना के दौरान सामने आए वीडियो में यह स्पष्ट दिखता है कि भरत भूषण तिवारी ने कथित रूप से हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। परिजनों का आरोप है कि सरेंडर के बाद भी पुलिस ने उन्हें गोली मार दी, जो पूरी तरह से गलत और न्याय के खिलाफ है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है, और यही कारण है कि न्यायिक जांच की मांग तेज हुई।
सरकार का फैसला और राजनीतिक हलचल
इस मामले में सरकार ने 20 जून को ही न्यायिक जांच की घोषणा कर दी थी। सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि घटना की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च न्यायालय के रिटायर्ड जज को जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके। हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। एनडीए के कुछ नेताओं ने एनकाउंटर पर सवाल उठाए हैं, जिससे सरकार के भीतर भी मतभेद की स्थिति देखने को मिल रही है।
अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकीं
फिलहाल, न्यायिक जांच की प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी है और रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा पूरे मामले की गहन जांच करेंगे। जांच में पुलिस कार्रवाई, घटनास्थल की परिस्थितियां और वायरल वीडियो जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा। परिजनों को उम्मीद है कि इस जांच से उन्हें न्याय मिलेगा, जबकि प्रशासन का कहना है कि सच्चाई सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा। अब यह देखना अहम होगा कि जांच रिपोर्ट किस दिशा में जाती है और क्या यह मामला किसी बड़े खुलासे की ओर बढ़ता है।
Read More-मोमबत्तियों की रोशनी में गूंजा अलीगंज हादसा: मोहर्रम पर ऐसा क्या हुआ कि हर कोई हो गया भावुक?
