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कॉपियां गायब, नंबरों में हेरफेर! CBSE के नए सिस्टम पर राहुल गांधी का बड़ा धमाका, भड़के शिक्षा मंत्री ने खोली पुरानी फाइलें

CBSE 12th Result को लेकर मचे भारी बवाल के बीच राहुल गांधी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान में ठन गई है। क्या सच में बच्चों के नतीजों में हुई है कोई बड़ी हेरफेर या यह सिर्फ राजनीतिक स्टंट है?

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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 12वीं कक्षा के नतीजे आने के बाद से शुरू हुआ हंगामा अब देश की सबसे बड़ी राजनीतिक जंग में तब्दील हो चुका है। देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की सांसें इस समय अटकी हुई हैं, क्योंकि इस बार मामला सीधे तौर पर देश के सबसे भरोसेमंद शिक्षा बोर्ड की साख और एक नई डिजिटल तकनीक पर आकर टिक गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस मुद्दे पर पूरी तरह आमने-सामने आ गए हैं। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब नतीजों में बड़े पैमाने पर विसंगतियां सामने आईं और छात्रों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी। राजनीति के गलियारों में अब सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है— क्या वाकई इस बार बच्चों के भविष्य के साथ पर्दे के पीछे कोई बहुत बड़ा खिलवाड़ हुआ है या फिर इस पूरे हंगामे के पीछे की कहानी कुछ और ही है?

आखिर कहाँ चूक गया CBSE का पूरा सिस्टम?

इस पूरे विवाद की जड़ में सीबीएसई द्वारा इस साल पहली बार इस्तेमाल किया गया ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम है। इस नई व्यवस्था के तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके शिक्षकों को कंप्यूटर या टैबलेट के माध्यम से डिजिटल तरीके से जांचने के लिए दिया गया था। बोर्ड का मुख्य उद्देश्य इस प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, सटीक और तेज बनाना था, ताकि इंसानी गलतियों को कम किया जा सके। लेकिन, जब परिणाम घोषित हुए तो जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। देश के कोने-कोने से छात्रों ने नंबरों में भारी हेरफेर और बेहद कम अंक मिलने की शिकायतें दर्ज करानी शुरू कर दीं। असली झटका तब लगा जब परेशान छात्रों ने री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) के लिए भारी फीस चुकाकर अपनी स्कैन की हुई कॉपियां मंगवाईं। कॉपियों को देखकर छात्रों और उनके माता-पिता के होश उड़ गए। कई कॉपियों के पन्ने पूरी तरह धुंधले (ब्लर) थे, कुछ जगह पन्ने आधे कटे हुए थे, जिससे लिखे हुए उत्तर गायब थे। हद तो तब हो गई जब कुछ ऐसे मामले भी सामने आए जहां एक छात्र के रोल नंबर पर किसी दूसरे ही अनजान छात्र की उत्तर पुस्तिका अपलोड कर दी गई थी। इस तकनीकी लापरवाही ने छात्रों के बीच डर, गुस्से और भारी मानसिक तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।

राहुल गांधी के तीखे तीर और शिक्षा मंत्री का पलटवार

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने छात्रों के इस गुस्से को भांपते हुए सीधे केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर चौतरफा हमला बोल दिया। राहुल गांधी ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि इस नए डिजिटल सिस्टम के नाम पर 12वीं के नतीजों में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ (टैंपरिंग) की गई है, जिससे लाखों मेधावी छात्रों का करियर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार निजी तकनीकी कंपनी के पुराने रिकॉर्ड पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और प्रधानमंत्री से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। राहुल गांधी के इन गंभीर आरोपों पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी बेहद आक्रामक और तीखे अंदाज में पलटवार किया है। धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणियां कुछ और नहीं, बल्कि विपक्ष को बार-बार मिल रही चुनावी हार से उपजी मानसिक हताशा का परिणाम हैं। शिक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एक अलग ही मानसिक स्थिति में पहुंच चुके हैं और वे कभी भी भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को स्वीकार नहीं कर पाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी विपक्ष ने इसरो (ISRO), ईवीएम (EVM) और डिजिटल इंडिया जैसी देश की बड़ी तकनीकी उपलब्धियों का लगातार विरोध किया था, जो उनकी देश-विरोधी और नकारात्मक सोच को दर्शाता है।

राजनीति अपनी जगह, लेकिन मासूमों के मानसिक तनाव का क्या? 

दोनों तरफ से तेज होती इस जुबानी जंग और तीखे बयानों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बात भी कही है। उन्होंने दोनों पक्षों से अपील करते हुए कहा कि राजनीति करने के लिए आगे बहुत समय मिलेगा, लेकिन इस समय हमारी सबसे पहली और बड़ी प्राथमिकता देश के मासूम छात्रों का मानसिक तनाव कम करना होना चाहिए। हालांकि, इस राजनीतिक खींचतान के बीच सरकार ने यह साफ तौर पर माना है कि इस नए सिस्टम को लागू करने में कुछ तकनीकी विसंगतियां और मानवीय भूलें जरूर हुई हैं, जिनकी जिम्मेदारी से सरकार और बोर्ड पीछे नहीं हट रहे हैं। इस विवाद को शांत करने और छात्रों को तुरंत न्याय दिलाने के लिए सरकार ने अब देश की सर्वोच्च तकनीकी संस्थाओं, यानी आईआईटी (IIT) कानपुर और आईआईटी मद्रास के शीर्ष विशेषज्ञों को इस पूरे ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की जांच और इसमें सुधार के लिए शामिल किया है। इसके साथ ही सीबीएसई ने प्रभावित छात्रों के लिए री-वैल्यूएशन की प्रक्रिया को बेहद तेज और पारदर्शी कर दिया है ताकि किसी भी होनहार बच्चे का पूरा साल या कॉलेज एडमिशन खराब न हो। सरकार ने देश को भरोसा दिलाया है कि इस पूरी प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले किसी भी बड़े अधिकारी या बाहरी एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा और छात्रों के हितों की रक्षा हर हाल में की जाएगी।

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