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परदादी के घर को देखने के लिए लेना पड़ता है टिकट, महारानी लक्ष्मीबाई के वंशजों का छलका दर्द

महारानी लक्ष्मीबाई के वंशज श्रीमंत योगेश राव नेवालकर ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद झांसी की रानी के परिवार को उचित सम्मान नहीं मिला।

महारानी लक्ष्मीबाई

झांसी की धरती पर महारानी लक्ष्मीबाई के वंशज श्रीमंत योगेश राव नेवालकर “झांसी वाले” पहुंचे और अपने दिल की बात जनता के सामने रखी। उन्होंने कहा कि आज भी उन्हें वह सम्मान और मान्यता नहीं मिला, जिसके अधिकारी वे थे। योगेश राव नेवालकर ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद दूसरे शाही परिवारों की तुलना में झांसी की रानी के वंशजों के साथ अनदेखी की गई।

उन्होंने कहा, “हमारा परिवार झांसी की रानी के इतिहास और गौरव को आज भी जिंदा रखता है, लेकिन लोग अक्सर भूल जाते हैं कि हम भी उस गौरवशाली इतिहास के हिस्से हैं।” इस दौरान उन्होंने स्थानीय मीडिया से बातचीत में अपने अनुभव साझा किए और बताया कि राजसी परिवार के बावजूद उन्हें अपनी विरासत को लेकर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

परदादी के घर को देखने के लिए खरीदना पड़ता है टिकट

वंशज योगेश राव नेवालकर ने झांसी की रानी के पुराने घर की स्थिति पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि अब पर्यटक या इतिहास प्रेमी परदादी के घर को देखने के लिए टिकट खरीदने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा, “हमारे परिवार के लिए यह बहुत दुखद है। हमारे परदादी का घर, जो हमारे इतिहास का प्रतीक है, अब एक पर्यटन स्थल बन गया है और इसे देखने के लिए टिकट देना पड़ता है।”
योगेश राव नेवालकर के अनुसार, यह बदलाव परिवार के लिए भावनात्मक रूप से कठिन है। वे चाहते हैं कि लोग केवल पर्यटन के नजरिए से नहीं, बल्कि इतिहास और सम्मान के दृष्टिकोण से इस विरासत को देखें। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महारानी लक्ष्मीबाई के परिवार को अब भी अपने गौरव को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास करना पड़ रहा है।

आज भी जीवित है झांसी की रानी का गौरव

श्रीमंत योगेश राव नेवालकर ने बताया कि उनके परिवार ने हमेशा महारानी लक्ष्मीबाई के नाम और उनके संघर्ष को संजोकर रखा है। उन्होंने कहा कि झांसी की रानी ने स्वतंत्रता संग्राम में जो भूमिका निभाई थी, वह अब भी लोगों के लिए प्रेरणा है।

उन्होंने स्थानीय विद्यार्थियों और इतिहासकारों के साथ चर्चा करते हुए कहा कि उनके परिवार का मकसद यह है कि झांसी की रानी की वीरता और शौर्य की कहानियां नई पीढ़ियों तक पहुंचें। उन्होंने अपने परिवार के अनुभव साझा किए और बताया कि यह इतिहास केवल किताबों में नहीं बल्कि परिवार के दिलों में जीवित है।

भविष्य की दिशा—वंशजों की चुनौती

वंशज योगेश राव नेवालकर ने कहा कि भविष्य में वे और उनके परिवार झांसी की रानी की विरासत को संरक्षित करने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की कोशिश है कि इतिहास प्रेमी और देशवासियों को केवल पर्यटन दृष्टि से नहीं, बल्कि सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव के साथ इस विरासत से रूबरू कराया जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि विरासत के संरक्षण और प्रचार के लिए परिवार स्थानीय अधिकारियों और संगठनों के साथ मिलकर योजना बना रहा है। उनका उद्देश्य है कि झांसी की रानी के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पूरी इमानदारी और सच्चाई के साथ पहुँचाया जा सके।

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