केरल से सामने आया यह मामला सोशल मीडिया की ताकत और उसके खतरनाक असर दोनों को उजागर करता है। 22 जनवरी को एक महिला सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शिमजिथा मुस्तफा ने सार्वजनिक बस में यात्रा के दौरान एक वीडियो रिकॉर्ड किया। इस वीडियो में उसने दावा किया कि बस में मौजूद एक शख्स ने उसके साथ छेड़छाड़ की। वीडियो में वह सीधे कैमरे पर उस व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाती नजर आई। वीडियो रिकॉर्ड होते ही उसने इसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अपलोड कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच गया। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को 20 लाख से ज्यादा बार देखा गया। वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी बताए गए शख्स की पहचान कोझिकोड निवासी दीपक के रूप में हुई। सोशल मीडिया पर लोग बिना किसी जांच या पुष्टि के दीपक को दोषी ठहराने लगे। कमेंट्स, मैसेज और ऑनलाइन ट्रोलिंग ने मामले को और भड़का दिया। किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि सच्चाई क्या है, वीडियो में क्या पूरा सच दिख रहा है या नहीं।
वायरल वीडियो के बाद टूटा दीपक, दो दिन में खत्म हो गई ज़िंदगी
वीडियो वायरल होने के दो दिन बाद एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। कोझिकोड में दीपक के माता-पिता ने अपने घर में अपने इकलौते बेटे को फांसी के फंदे से लटका पाया। पुलिस को दी गई शिकायत में परिजनों ने कहा कि दीपक पूरी तरह निर्दोष था। उनका कहना है कि वीडियो वायरल होने के बाद दीपक गहरे मानसिक तनाव में चला गया था। उसे समाज में अपमान और बदनामी का डर सताने लगा था। परिजनों के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद दीपक ने दो दिन तक खाना तक नहीं खाया और किसी से खुलकर बात भी नहीं की। वह बार-बार यही कहता रहा कि उसने कुछ गलत नहीं किया, फिर भी लोग उसे अपराधी समझ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और लगातार हो रहे आरोपों ने दीपक को मानसिक रूप से तोड़ दिया, जिसके बाद उसने यह खौफनाक कदम उठा लिया। दीपक की मौत के बाद यह मामला सिर्फ एक आरोप का नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया ट्रायल और उसके नतीजों पर बड़ा सवाल बन गया।
परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस एक्शन, इंफ्लुएंसर गिरफ्तार
दीपक की आत्महत्या के बाद उसके परिजनों ने पुलिस से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में उन्होंने महिला इंफ्लुएंसर पर झूठा आरोप लगाने और उनके बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि दीपक और शिमजिथा मुस्तफा पिछले सप्ताह एक ही बस में यात्रा कर रहे थे। पुलिस ने वीडियो, बस रूट, समय और अन्य तकनीकी सबूतों की जांच शुरू की। इस बीच, इंफ्लुएंसर शिमजिथा मुस्तफा ने पहले वायरल वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दिया। बाद में उसने अपना बचाव करते हुए एक और वीडियो अपलोड किया, जिसमें उसने अपने पक्ष में बातें रखीं। हालांकि, यह वीडियो भी बाद में प्राइवेट कर दिया गया। पुलिस ने मृतक के परिवार के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर महिला इंफ्लुएंसर को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि वीडियो बनाने के पीछे उसकी मंशा क्या थी और क्या आरोपों की पुष्टि के ठोस सबूत मौजूद हैं।
सोशल मीडिया ट्रायल पर बड़ा सवाल
यह मामला अब सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक चेतावनी बन गया है। सोशल मीडिया पर किसी पर आरोप लगाना जितना आसान हो गया है, उतना ही खतरनाक इसका अंजाम भी हो सकता है। बिना पुलिस जांच, बिना अदालत के फैसले के किसी को दोषी ठहरा देना एक इंसान की जिंदगी तबाह कर सकता है—दीपक का मामला इसका ताजा उदाहरण बन गया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि छेड़छाड़ का आरोप सही था या नहीं, और वीडियो में कितनी सच्चाई थी। फिलहाल महिला इंफ्लुएंसर से पूछताछ जारी है और मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। दूसरी ओर, दीपक का परिवार इंसाफ की मांग कर रहा है और चाहता है कि उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिले। यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला हर वीडियो सच नहीं होता और किसी की जिंदगी पर फैसला सुनाने से पहले सच्चाई जानना कितना जरूरी है।
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