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मकर संक्रांति से पहले आने वाला था पैसा, ऐन वक्त पर EC ने लगाई रोक, लाडकी बहिन योजना पर बड़ा फैसला

महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने लाडकी बहिन योजना के तहत अग्रिम भुगतान पर रोक लगा दी है। जानिए क्यों रुका महिलाओं के खातों में पैसा

महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनावों से पहले राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने ‘लाडकी बहिन योजना’ को लेकर बड़ा और अहम फैसला लिया है। आयोग ने चुनाव से ठीक एक दिन पहले लाभार्थी महिलाओं के खातों में योजना की राशि डालने पर रोक लगा दी है। हालांकि आयोग ने यह भी साफ किया है कि योजना को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है, बल्कि केवल अग्रिम (Advance) भुगतान पर रोक लगाई गई है।

दरअसल, राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण चुनाव आयोग ने यह कदम उठाया है। आयोग का मानना है कि चुनावी माहौल में किसी भी सरकारी योजना के तहत अतिरिक्त या समय से पहले लाभ देना मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। इसी वजह से जनवरी माह की राशि को पहले से देने की अनुमति नहीं दी गई है, जबकि नियमित और पहले से तय भुगतान जारी रह सकते हैं।

3000 रुपये की खबरों से बढ़ी शिकायतें, आयोग हरकत में आया

लाडकी बहिन योजना को लेकर विवाद तब बढ़ा जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि मकर संक्रांति से पहले महिलाओं के खातों में दिसंबर और जनवरी की किस्त मिलाकर 3000 रुपये डाले जाएंगे। इन खबरों के सामने आने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को कई शिकायतें मिलीं।

शिकायतों में आरोप लगाया गया कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की घोषणा मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास हो सकती है। इसी को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने राज्य सरकार से आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा और मुख्य सचिव को इस पूरे मामले पर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए। आयोग यह जानना चाहता था कि क्या वाकई चुनावी प्रक्रिया के दौरान अग्रिम भुगतान की तैयारी की जा रही है और क्या यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है।

चुनाव आयोग का साफ संदेश: नियमित लाभ मिलेगा, लेकिन एडवांस नहीं

मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। आयोग ने बताया कि 4 नवंबर 2025 को स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनावों के लिए आचार संहिता से जुड़ा समेकित आदेश पहले ही जारी किया जा चुका है। इस आदेश के अनुसार, चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की गई योजनाओं को जारी रखा जा सकता है, लेकिन उनके स्वरूप में कोई बदलाव या अतिरिक्त लाभ नहीं दिया जा सकता।

इसी आधार पर आयोग ने कहा कि ‘लाडकी बहिन योजना’ के तहत महिलाओं को नियमित मासिक सहायता दी जा सकती है, लेकिन जनवरी महीने की राशि को पहले से देना नियमों के खिलाफ होगा। साथ ही, इस दौरान योजना में नए लाभार्थियों को जोड़ने पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। आयोग ने यह भी दोहराया कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की छूट इस सिद्धांत के खिलाफ होगी।

योजना की सियासी अहमियत और महिलाओं पर असर

लाडकी बहिन योजना महाराष्ट्र सरकार की सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। माना जाता है कि 2024 के विधानसभा चुनावों में महायुति की जीत के पीछे इस योजना की बड़ी भूमिका रही थी।

हाल ही में बीजेपी नेता और राज्य मंत्री गिरीज महाजन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दावा किया था कि मकर संक्रांति से पहले महिलाओं को 3000 रुपये दिए जाएंगे और इसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से “विशेष उपहार” बताया गया था। इसी बयान के बाद राजनीतिक विवाद गहराया और आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा।
अब आयोग के फैसले के बाद जहां विपक्ष सरकार पर चुनावी लाभ लेने का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वह चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का पालन करेगी। दूसरी ओर, कई लाभार्थी महिलाओं में असमंजस की स्थिति है। हालांकि आयोग ने यह साफ कर दिया है कि योजना बंद नहीं हुई है और चुनाव के बाद नियमित भुगतान फिर से सामान्य तरीके से जारी रहेगा।

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