PM Modi: आज पूरा देश आजादी का 79वां जश्न मना रहा है, लेकिन लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो घोषणा की, उसने न सिर्फ देशवासियों बल्कि वैश्विक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने “मिशन सुदर्शन चक्र” की शुरुआत कर दी है — एक ऐसा कदम, जो भारत की सुरक्षा रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। उन्होंने साफ कहा, “न्यूक्लियर की धमकियों को अब भारत चुपचाप नहीं सहेगा।” इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों तक, हर जगह इस मिशन के मायने और इसके असर पर चर्चा शुरू हो गई है।
मिशन का रहस्य और शक्ति का संकेत
दोपहर 8:15 बजे शुरू हुए संबोधन में पीएम मोदी ने मिशन के बारे में ज्यादा तकनीकी जानकारी नहीं दी, लेकिन उनके शब्दों में एक गहरा संदेश छिपा था। उन्होंने इशारों में कहा कि यह मिशन भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का अगला अध्याय होगा, जिसमें नई टेक्नोलॉजी, उन्नत मिसाइल सिस्टम और रणनीतिक साझेदारियां शामिल होंगी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि “सुदर्शन चक्र” नाम ही अपने आप में भारत की पौराणिक और सैन्य शक्ति के संगम का प्रतीक है, यह संकेत हो सकता है कि आने वाले समय में भारत न केवल रक्षात्मक, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर आक्रामक रुख भी अपनाएगा।
दुनिया में बढ़ी हलचल, भारत की नई तैयारी
इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हलचल मच गई है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे देशों की खुफिया एजेंसियां इस मिशन के संभावित दायरे और उद्देश्यों का अध्ययन शुरू कर चुकी हैं। वहीं, देश में यह खबर देशभक्ति की लहर के साथ उम्मीदों और सवालों का मिश्रण पैदा कर रही है। क्या “मिशन सुदर्शन चक्र” सिर्फ रक्षा क्षमता को बढ़ाने का प्रयास है, या इसके पीछे भारत का वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने का इरादा है? जवाब आने वाले महीनों में सामने आएगा, लेकिन आज लाल किले से गूंजे इन शब्दों ने यह साफ कर दिया कि भारत अब ‘रक्षा’ की परिभाषा को नए सिरे से लिखने के लिए तैयार है।
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