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लाल किले से PM मोदी के ऐलान के बाद भड़के उमर अब्दुल्ला, कहा-‘क्या हमारी आवाज दिल्ली तक नहीं पहुंचती?’

किश्तवाड़ आपदा पर जताया दुख, पूर्ण राज्य का दर्जा न मिलने से निराशा; केंद्र से पूछा– "क्या हमारी आवाज दिल्ली तक नहीं पहुंचती?"

Omar Abdullah

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बाद नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने किश्तवाड़ आपदा में जान गंवाने वालों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह त्रासदी राज्य के लोगों के दिलों को झकझोर गई है। मुख्यमंत्री ने राहत और पुनर्वास के कार्य में केंद्र सरकार से सहयोग की उम्मीद जताई, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह देश के बाकी हिस्सों के लिए विकास और प्रगति की घोषणाएं की जाती हैं, उसी तरह जम्मू-कश्मीर के लिए भी ठोस कदम उठाए जाने चाहिए थे।

पूर्ण राज्य के दर्जे पर चुप्पी से नाराजगी

उमर अब्दुल्ला ने खास तौर पर इस बात पर निराशा जताई कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर कोई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा, “हमने क्या खता की है कि हमें बराबरी का हक नहीं दिया जा रहा?” उन्होंने केंद्र से पूछा कि क्या जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज दिल्ली तक नहीं पहुंचती। मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि यहां के लोग भी देश के बाकी नागरिकों की तरह अधिकार और सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने यह दावा किया कि राज्य में हालात काफी हद तक सामान्य हो चुके हैं, और अब समय आ गया है कि लोकतांत्रिक अधिकार बहाल किए जाएं।

केंद्र और राज्य के रिश्तों पर फिर उठे सवाल

इस बयान के साथ एक बार फिर केंद्र और जम्मू-कश्मीर के रिश्तों पर बहस तेज हो गई है। उमर अब्दुल्ला का कहना है कि अगर राज्य के लोगों को लगातार उपेक्षित महसूस कराया गया तो इससे दूरियां बढ़ेंगी, जो देश के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने केंद्र से अपील की कि विकास योजनाओं के साथ-साथ राजनीतिक विश्वास बहाली के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं। उनका यह भी कहना था कि किश्तवाड़ जैसी आपदाएं हमें याद दिलाती हैं कि इंसानी जिंदगी और सम्मान सबसे ऊपर हैं, और इन्हें राजनीतिक मुद्दों से ऊपर रखा जाना चाहिए।

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