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एक चीख और सब खत्म… मां कपड़े धोती रही, इधर 1 माह की मासूम पर टूट पड़ा आवारा कुत्ता, हुई मौत

मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र में आवारा कुत्ते के हमले में एक माह की मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत। जानिए कैसे हुआ हादसा

मिर्जापुर

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर दिया। विंध्याचल थाना क्षेत्र के कलना गहवार गांव में एक माह की मासूम बच्ची की आवारा कुत्ते के हमले में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शुक्रवार सुबह बच्ची की मां कविता उसे घर के बरामदे में सुरक्षित समझकर लिटाकर कपड़े धोने चली गई थीं। इसी दौरान बाहर से आए एक आवारा कुत्ते ने बच्ची पर हमला कर दिया। परिवार के मुताबिक कुत्ते ने पहले बच्ची को जबड़े में दबोचा और फिर उसके सिर और चेहरे पर बुरी तरह हमला कर दिया। मासूम की चीख सुनते ही मां दौड़कर बाहर आईं और डंडे से कुत्ते को भगाया, लेकिन तब तक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो चुकी थी। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस दर्दनाक हादसे से स्तब्ध है।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गई जिंदगी की डोर

हमले के तुरंत बाद परिजन बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल लेकर निकले। परिवार को उम्मीद थी कि समय रहते इलाज मिल जाएगा, लेकिन रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने भी बच्ची को मृत घोषित कर दिया। मंडलीय अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार बच्ची के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं, जिनकी वजह से उसकी जान नहीं बच सकी। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक खबर के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। गांव के लोगों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया और कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।

बिना पुलिस को सूचना दिए किया अंतिम संस्कार

परिजनों ने गहरे सदमे में बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। बताया गया कि घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी गई थी। बाद में जब इस मामले की चर्चा हुई तो स्थानीय पुलिस ने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की कि एक मासूम बच्ची को कुत्ते के हमले के बाद लाया गया था, लेकिन उसकी पहले ही मौत हो चुकी थी। घटना के बाद गांव में लोग प्रशासन से आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार कुत्तों के हमले की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा बना चिंता का विषय

यह घटना एक बार फिर आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आबादी वाले इलाकों में आवारा जानवरों की संख्या बढ़ने से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आवारा कुत्तों को पकड़ने और उनके प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था होती, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। ग्रामीण अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि इलाके में विशेष अभियान चलाकर आवारा कुत्तों को पकड़ा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। मासूम मुनीता की मौत ने पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि इस हादसे से सबक लेकर प्रशासन जल्द जरूरी कदम उठाएगा।

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