मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल किए जाने की बात सामने आई है। याचिका में कथित तौर पर ऐसे फैसलों को रद्द करने की मांग की गई है, जिन्हें याचिकाकर्ता ने एकतरफा बताया है। साथ ही मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले को चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़े विवाद के बीच अदालत के सामने लाया गया है।
अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग
याचिका में कहा गया है कि यदि अधिकारी अपने आधिकारिक कर्तव्यों के जानबूझकर उल्लंघन के दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज कर कार्रवाई की जाए। याचिका में ज्ञानेश कुमार के साथ अन्य संबंधित अधिकारियों को भी कार्रवाई के दायरे में रखने का अनुरोध बताया गया है। हालांकि, इन मांगों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या रुख अपनाया है या कोई अंतिम आदेश दिया है, यह अलग विषय है और याचिका में की गई मांग को अदालत का फैसला नहीं माना जा सकता।
SIR को लेकर पहले से चल रहा विवाद
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। 23 सितंबर को सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयोग के तीन आयुक्तों में से दो ने कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। बाद की रिपोर्टों में भी आयोग के भीतर कथित मतभेद और 14 फैसलों को लेकर सवाल उठाए जाने का जिक्र हुआ है।
अदालत में मामला पहुंचने से बढ़ी नजर
ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों को लेकर अलग-अलग अदालतों में कानूनी चुनौतियों की खबरें भी सामने आई हैं। 25 सितंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट में भी ऐसी याचिका दाखिल होने की रिपोर्ट आई, जिसमें 14 फैसलों को चुनौती देने के साथ महाराष्ट्र में SIR से जुड़ी कुछ मांगें रखी गई हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल बताई जा रही याचिका पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है, इस पर नजर बनी हुई है। फिलहाल याचिका में की गई मांगें याचिकाकर्ता का पक्ष हैं, न कि अदालत द्वारा तय किए गए तथ्य।
