कटरा (जम्मू-कश्मीर): माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। त्रिकुटा पहाड़ियों पर लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बुधवार शाम को अचानक एक बड़ा भूस्खलन (लैंडस्लाइड) हो गया। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसने कटरा से लेकर भवन तक के श्रद्धालुओं में थोड़ी चिंता बढ़ा दी है। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कुछ बड़े कदम उठाए हैं, जिससे यात्रा के एक हिस्से पर असर पड़ा है।
हिमकोटी के पास गिरा मलबा, बैटरी कार सेवा पर लगा ब्रेक
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह भूस्खलन माता वैष्णो देवी भवन जाने वाले नए मार्ग पर हिमकोटी के पास हुआ है। पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और कीचड़ सड़क पर आ जाने के कारण इस रूट पर चलने वाली बैटरी कार सेवा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। जैसे ही श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को इसकी सूचना मिली, वैसे ही बिना कोई वक्त गंवाए मलबे को साफ करने के लिए विशेष टीमों और आधुनिक मशीनों को मौके पर रवाना कर दिया गया। रास्ते से कीचड़ और पत्थरों को हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है ताकि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके।
मुश्किलों के बीच हौसला बुलंद, इस रास्ते से जारी है पवित्र सफर
भले ही नए मार्ग पर कीचड़ और मलबे की वजह से बैटरी कार सेवा ठप हो गई है, लेकिन माता के भक्तों के कदम नहीं रुके हैं। श्राइन बोर्ड के अनुसार, मुख्य यात्रा पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है और श्रद्धालु पुराने मार्ग का इस्तेमाल करके लगातार पवित्र भवन की ओर बढ़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि नए मार्ग पर कीचड़ होने के बावजूद कई उत्साही तीर्थयात्री पैदल ही अपनी यात्रा पूरी करने में जुटे हैं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जगह-जगह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और भक्तों को गाइड कर रहे हैं।
आस्था का अटूट केंद्र: त्रिकुटा पर्वत पर विराजमान हैं मां वैष्णो
जम्मू-कश्मीर की खूबसूरत त्रिकुटा पहाड़ियों में समुद्र तल से करीब 5,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर देश-दुनिया के हिंदुओं के लिए सर्वोच्च तीर्थस्थलों में से एक है। यहां माता वैष्णो देवी तीन पवित्र पिंडियों के रूप में विराजमान हैं, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का रूप माना जाता है। कटरा से शुरू होने वाली इस 13 किलोमीटर की पावन और कठिन चढ़ाई को पूरा करने के लिए भक्त पैदल, खच्चर, बैटरी कार और हेलीकॉप्टर सेवा का सहारा लेते हैं। विपरीत मौसम में भी भक्तों की यह अटूट आस्था ही है, जो उन्हें हर बाधा को पार करके मां के दरबार तक पहुंचा देती है।
Read more-भारतीय क्रिकेट के इतिहास में पहली बार टीम की हुई इतनी बुरी हालात, दर्ज हुआ ये शर्मनाक रिकॉर्ड
