अमेरिका के White House में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम के दौरान अचानक गोलीबारी की खबरों ने अफरा-तफरी मचा दी। उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump मंच से भाषण दे रहे थे, तभी सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें कार्यक्रम स्थल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सीक्रेट सर्विस की यह तेज प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई, लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक अलग ही तरह की हलचल देखने को मिली। कई यूजर्स ने सवाल उठाए कि आखिर घटना कितनी गंभीर थी और क्या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
ईरान का AI वीडियो बना नया ‘डिजिटल हथियार’
घटना के कुछ ही समय बाद ईरान से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स ने एक AI-जनरेटेड वीडियो जारी किया, जिसने इस पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय बहस में ला दिया। इस वीडियो में लेगो-स्टाइल एनिमेशन और रैप म्यूजिक का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप की लीडरशिप और सुरक्षा व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया गया। वीडियो में दिखाया गया कि कैसे एक छोटी सी घटना को ‘ड्रामा’ में बदला गया। गाने की लाइनों के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि ट्रंप अपनी लोकप्रियता घटने पर ऐसे हालात का इस्तेमाल ध्यान खींचने के लिए करते हैं। यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ और लाखों लोगों तक पहुंच गया।
ट्रंप प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप
वीडियो में सिर्फ मजाक ही नहीं, बल्कि कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन मीडिया नैरेटिव को कंट्रोल करने की कोशिश करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी पकड़ सीमित है। गाने में ‘खाली प्लेटें’, ‘जल्दबाजी में निकासी’ और ‘बनावटी माहौल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए यह दिखाने की कोशिश की गई कि घटना के दौरान वास्तविक खतरा कम था, लेकिन माहौल को ज्यादा नाटकीय बना दिया गया। साथ ही यह भी दावा किया गया कि अमेरिका आर्थिक दबाव से जूझ रहा है और यहां तक कि कुछ MAGA समर्थक भी अब सवाल उठाने लगे हैं।
AI प्रोपेगैंडा का बढ़ता खतरा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति
यह पहली बार नहीं है जब ईरान या उससे जुड़े समूहों ने इस तरह के AI वीडियो का इस्तेमाल किया हो। इससे पहले भी कई व्यंग्यात्मक और प्रोपेगैंडा शैली के कंटेंट सामने आ चुके हैं, जिनमें राजनीतिक संदेश छिपा होता है। हाल ही में कुछ प्लेटफॉर्म्स ने ऐसे कंटेंट बनाने वाले ग्रुप्स पर कार्रवाई भी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि राजनीतिक हथियार भी बनती जा रही है। यह घटना दिखाती है कि कैसे डिजिटल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक-दूसरे से जुड़कर नए तरह के ‘सूचना युद्ध’ को जन्म दे रहे हैं। आने वाले समय में इस तरह के कंटेंट पर नियंत्रण और सत्यता की जांच बड़ी चुनौती बन सकती है।