भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीतिक और आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत अब तक 26 देशों के साथ 28 प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी (Migration and Mobility Partnership) या इसी तरह के समझौते कर चुका है। इसके अलावा कई अन्य देशों के साथ भी इस विषय पर बातचीत जारी है। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय नागरिकों के लिए विदेशों में सुरक्षित, कानूनी और व्यवस्थित तरीके से रोजगार, शिक्षा और पेशेवर अवसरों का रास्ता आसान बनाना है। सरकार का मानना है कि यदि लोगों की आवाजाही को सही ढंग से प्रबंधित किया जाए तो इससे न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, बल्कि कौशल और प्रतिभा का बेहतर उपयोग भी संभव हो पाता है।
सुरक्षित और कानूनी प्रवास पर सरकार का विशेष फोकस
मानव संसाधन गतिशीलता से जुड़े एक कार्यक्रम में बोलते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ऐसे मॉडल को बढ़ावा देना चाहता है जिसमें विदेश जाने वाले लोगों को सुरक्षित और कानूनी रास्ते उपलब्ध हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवासन केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, कौशल विकास, निवेश और वैश्विक सहयोग का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। सरकार का लक्ष्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिससे भारतीय पेशेवरों, छात्रों और कुशल कामगारों को विदेशों में बेहतर अवसर मिल सकें। साथ ही मेजबान देशों को भी प्रशिक्षित और योग्य मानव संसाधन उपलब्ध हो, जिससे दोनों पक्षों को समान लाभ मिले। भारत इन समझौतों को आपसी विश्वास, साझा जिम्मेदारी और दीर्घकालिक सहयोग की नींव मानता है।
अवैध प्रवासन और मानव तस्करी के खिलाफ सख्त संदेश
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों के बढ़ते खतरे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे अपराध न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि कानूनी प्रवासन व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी कमजोर करते हैं। इसलिए सभी देशों की यह साझा जिम्मेदारी है कि वे मिलकर इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाएं। सरकार का मानना है कि पारदर्शी और नियम आधारित प्रवासन व्यवस्था ही लोगों को सुरक्षित रख सकती है। इसी उद्देश्य से भारत अपने साझेदार देशों के साथ सूचना साझा करने, निगरानी बढ़ाने और कानूनी प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर भी जोर दे रहा है।
बदलती दुनिया में प्रतिभा बनेगी सबसे बड़ी ताकत
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीकें रोजगार तथा कौशल की जरूरतों को पूरी तरह बदल रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण और हरित अर्थव्यवस्था जैसी नई चुनौतियों के बीच कुशल मानव संसाधन की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में भारत अपनी युवा आबादी और प्रतिभाशाली कार्यबल को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। उनके अनुसार, मानव संसाधन की गतिशीलता केवल लोगों के एक देश से दूसरे देश जाने का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रतिभा को अवसरों से जोड़ने और वैश्विक विकास में साझेदारी बढ़ाने का माध्यम है। आने वाले वर्षों में भारत इसी रणनीति के जरिए दुनिया के साथ अपने आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने की तैयारी कर रहा है।
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