पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से एक बेहद दहला देने वाली और दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। क्वेटा के पास स्थित सोरांगे कोयला क्षेत्र में एक निजी खदान के भीतर कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां काम कर रहे मजदूरों की जिंदगी को पलभर में लील लिया। जमीन से करीब 4,000 फीट की गहराई में अचानक मीथेन गैस का एक जोरदार विस्फोट हुआ, जिससे खदान के भीतर भीषण आग भड़क उठी। यह धमाका इतना भयानक था कि इसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दी और देखते ही देखते खदान का एक बड़ा हिस्सा अंदर ही ढह गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
एक साथ दो खदानें हुईं तबाह, अंदर फंसे थे 34 मजदूर
यह हादसा सिर्फ एक खदान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा इतना बड़ा था कि इसने पास की दूसरी खदान को भी अपनी चपेट में ले लिया। मिली जानकारी के अनुसार, जब यह खौफनाक घटना घटी, तो दोनों खदानों के भीतर कुल 34 मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर रोजी-रोटी कमाने के लिए पसीना बहा रहे थे। पहली खदान में जहां लगभग 24 मजदूर काम कर रहे थे, वहीं पास की दूसरी खदान में 12 मजदूर मौजूद थे। बलूचिस्तान के मुख्य खान निरीक्षक मोहम्मद आतिफ ने पुष्टि की है कि राहत और बचाव दलों ने मलबे से अब तक 32 मजदूरों के शव बाहर निकाल लिए हैं, लेकिन अभी भी दो मजदूरों की तलाश पूरी नहीं हो पाई है।
जहरीली गैस और आग के गोलों के बीच जान जोखिम में डालकर चल रहा रेस्क्यू
हाथों में उम्मीद की किरण और दिल में अपनों को बचाने की जिद लिए राहत और बचाव दल लगातार खदान के भीतर उतरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हालात बेहद भयावह हैं। खनन इंजीनियरों और रेस्क्यू वर्कर्स ने अंदर तक पहुंचने के लिए कुछ वैकल्पिक रास्ते जरूर तैयार किए हैं, मगर खदान के अंदर भरी जहरीली मीथेन गैस और लगातार धधक रही आग ने इस अभियान को एक बड़ी चुनौती बना दिया है। गहराई में ऑक्सीजन की कमी और गैस के रिसाव के कारण बचाव कर्मियों को कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा है। लापता बचे हुए दो खनिकों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे उनकी सलामती पर गहरी आशंका बनी हुई है।
पाकिस्तान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लगातार होते मौत के खेल
यह कोई पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान के किसी खनन क्षेत्र में इस तरह का खौफनाक मंजर देखने को मिला हो, बल्कि देश में कमजोर सुरक्षा मानकों के कारण ऐसे हादसे आए दिन आम होते जा रहे हैं। कुछ महीने पहले ही जून में क्वेटा के खानोजाई इलाके में विस्फोटक सामग्री फटने से लोग घायल हुए थे, तो वहीं अप्रैल में बोलान जिले की एक खदान में भी मजदूरों की जान चली गई थी। इसके बावजूद खदान मालिकों और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न किए जाने के कारण गरीब मजदूर अपनी जान हथेली पर रखकर काम करने को मजबूर हैं। सोरांगे खदान का यह ताजा हादसा एक बार फिर वहां की व्यवस्था पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े करता है।
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