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‘मैं शपथ लेता हूं…’ दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हिमंत बिस्वा सरमा, नई टीम में कई बड़े चेहरे शामिल

हिमंत बिस्वा सरमा ने दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। जानें नए मंत्रिमंडल में किन नेताओं को मिली जगह और कैसा रहा उनका राजनीतिक सफर।

असम की राजनीति में मंगलवार का दिन ऐतिहासिक रहा। भाजपा के वरिष्ठ नेता Himanta Biswa Sarma ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर राज्य की सत्ता फिर अपने हाथ में ले ली। विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन को मिली शानदार जीत के बाद राजधानी गुवाहाटी में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। राज्यपाल ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही असम में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल शुरू हो गया। समारोह में प्रधानमंत्री Narendra Modi, गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh और कई बड़े केंद्रीय नेता मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम को भाजपा के लिए पूर्वोत्तर में बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है। शपथ लेते ही हिमंत सरमा ने कहा कि उनकी सरकार विकास, रोजगार और जनता की समस्याओं के समाधान पर तेजी से काम करेगी।

नई सरकार में इन नेताओं को मिली जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री के साथ कई नेताओं ने मंत्री पद की शपथ लेकर नई सरकार का हिस्सा बने। नई कैबिनेट में Rameswar Teli, Atul Bora, Charan Boro और Ajanta Neog को अहम जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा ने इस बार क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल तैयार किया है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, इसलिए सहयोगी दलों को भी सरकार में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। नई सरकार से लोगों को बेहतर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं की उम्मीद है। वहीं विपक्ष अब सरकार के फैसलों और वादों पर नजर बनाए हुए है। शपथ ग्रहण के दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे, जिनमें जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

कांग्रेस से बीजेपी तक, ऐसा रहा हिमंत का सफर

हिमंत बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प और संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी। लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद साल 2015 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। उस समय भाजपा असम में उतनी मजबूत नहीं थी, लेकिन हिमंत सरमा ने संगठन को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई। उनकी रणनीति और राजनीतिक समझ की वजह से भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों में तेजी से विस्तार किया। बाद में उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस यानी NEDA का संयोजक बनाया गया। उन्होंने कई क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़ने का काम किया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पूर्वोत्तर में भाजपा की लगातार सफलता के पीछे हिमंत सरमा की मेहनत और रणनीति सबसे बड़ा कारण है। आज वह भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था राजनीतिक जीवन

Himanta Biswa Sarma की शुरुआती पढ़ाई गुवाहाटी में हुई। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद कानून की शिक्षा भी हासिल की। कुछ समय तक उन्होंने वकालत भी की, लेकिन बाद में पूरी तरह राजनीति में सक्रिय हो गए। उनका राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। वह छात्र संघ के महासचिव भी रह चुके हैं। साल 2001 में उन्होंने पहली बार जालुकबारी सीट से चुनाव जीता और तब से लगातार जनता का भरोसा जीतते आ रहे हैं। उनकी पहचान तेज फैसले लेने वाले नेता के रूप में होती है। अब दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे राज्य में विकास की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद की जा रही है। आने वाले समय में असम की राजनीति में उनका प्रभाव और मजबूत होता दिखाई दे रहा है।

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