देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo के लिए यह समय बेहद मुश्किल भरा है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइन पर ₹22.20 करोड़ का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई किसी एक छोटी गलती की वजह से नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे नियम उल्लंघन और सिस्टम में खामियों के कारण की गई है। DGCA की जांच में पाया गया कि IndiGo ने उड़ानों को समय पर चलाने और लागत कम रखने के लिए अपने ऑपरेशन को जरूरत से ज्यादा “ऑप्टिमाइज” किया, लेकिन सुरक्षा, क्रू की उपलब्धता और बैकअप प्लान पर उतना ध्यान नहीं दिया। रेगुलेटर का कहना है कि एविएशन सेक्टर में ऐसी लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों के लिए खतरा बन सकती है। इसी वजह से DGCA ने सिर्फ चेतावनी देने के बजाय कड़ा कदम उठाया, ताकि भविष्य में एयरलाइन नियमों को हल्के में न ले।
₹22.20 करोड़ का जुर्माना कैसे बना?
DGCA ने अपने आदेश में जुर्माने का पूरा गणित साफ-साफ बताया है। जांच के दौरान IndiGo पर नियमों के उल्लंघन के कुल 6 अलग-अलग मामले सामने आए। हर मामले में ₹30 लाख का जुर्माना लगाया गया, जिससे यह रकम ₹1.80 करोड़ हो गई। लेकिन असली झटका इसके बाद लगा। DGCA ने यह भी पाया कि IndiGo ने 68 दिनों तक लगातार नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया। इसके लिए रेगुलेटर ने ₹30 लाख प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया, जो कुल ₹20.40 करोड़ बैठता है। जब इन दोनों रकमों को जोड़ा गया, तो कुल जुर्माना ₹22.20 करोड़ हो गया। DGCA का साफ कहना है कि यह जुर्माना सिर्फ सजा नहीं है, बल्कि एयरलाइन इंडस्ट्री के लिए एक चेतावनी है कि नियमों से समझौता करने की कीमत चुकानी ही पड़ेगी।
₹50 करोड़ की बैंक गारंटी: सुधार होंगे तभी पैसा वापस मिलेगा
जुर्माने के साथ-साथ DGCA ने IndiGo को ₹50 करोड़ की बैंक गारंटी जमा करने का आदेश भी दिया है। यह रकम ISRAS यानी IndiGo Systemic Reform Assurance Scheme के तहत ली जाएगी। आसान शब्दों में कहें तो यह एक तरह की सुरक्षा राशि है, जो तब तक DGCA के पास रहेगी, जब तक एयरलाइन अपने सिस्टम और कामकाज में जरूरी सुधार नहीं कर लेती। DGCA ने सुधार के लिए चार बड़े क्षेत्र तय किए हैं। पहले चरण में लीडरशिप और गवर्नेंस में सुधार करना होगा, जिसके लिए 3 महीने का समय दिया गया है और इसके बाद ₹10 करोड़ रिलीज होंगे। दूसरे चरण में क्रू मैनेजमेंट, रोस्टर और थकान प्रबंधन पर 6 महीने की निगरानी होगी, इसके बाद ₹15 करोड़ मिलेंगे। तीसरे चरण में डिजिटल सिस्टम और ऑपरेशनल मजबूती के लिए 9 महीने का समय तय किया गया है, जिसमें सुधार पूरा होने पर ₹15 करोड़ रिलीज होंगे। आखिरी चरण में बोर्ड स्तर पर निगरानी और नियम पालन सुनिश्चित करना होगा, जिसके बाद बाकी ₹10 करोड़ वापस मिलेंगे। हर चरण की अलग-अलग जांच होगी और DGCA के साथ नागर विमानन मंत्रालय (MoCA) भी इस पर नजर रखेगा।
दिसंबर 2025 में क्या हुआ था?
इस पूरे मामले की शुरुआत दिसंबर 2025 के उस बड़े ऑपरेशनल संकट से हुई थी, जब 3 से 5 दिसंबर के बीच IndiGo की 2,507 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं और 1,852 उड़ानें देरी से चलीं। इस वजह से 3 लाख से ज्यादा यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। DGCA की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि IndiGo ने नई FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किया। क्रू पर ज्यादा दबाव डाला गया, ड्यूटी के घंटे बढ़ाए गए और आराम के लिए जरूरी समय नहीं दिया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि डेड-हेडिंग, टेल स्वैप और लंबी ड्यूटी जैसी प्रैक्टिस से क्रू की थकान बढ़ी और ऑपरेशन पर असर पड़ा। DGCA ने इस मामले में IndiGo के CEO को चेतावनी दी, COO को वार्निंग दी और SVP (OCC) को ऑपरेशनल जिम्मेदारियों से हटाने के निर्देश दिए। हालांकि DGCA ने यह भी माना कि IndiGo ने हालात संभालने की कोशिश की और यात्रियों को राहत दी। जिन यात्रियों की उड़ानें 3 घंटे से ज्यादा देर से चलीं या रद्द हुईं, उन्हें ₹10,000 का “Gesture of Care” वाउचर दिया गया, जो 12 महीने तक मान्य है। वहीं IndiGo का कहना है कि वह DGCA के आदेशों को गंभीरता से ले रही है और अपने सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए जरूरी कदम उठा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए।