यूपी विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मंगलवार को उस वक्त तीखा गतिरोध देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भाषण समाजवादी पार्टी (सपा) के भारी हंगामे के चलते अधूरा रह गया। सदन में राम मंदिर, नीट पेपर लीक और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर विपक्षी विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके कारण मुख्यमंत्री को अपनी बात बीच में ही रोकनी पड़ी। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने सूबे की सियासत में एक बार फिर गरमी ला दी है।
विपक्ष के रवैये पर सीएम योगी का तीखा हमला
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर बेहद कड़े शब्दों में निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार प्रदेश की 25 करोड़ जनता के हितों से जुड़े हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर सार्थक चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी दलों की सर्वदलीय बैठक में विषयों पर आम सहमति बनने के बावजूद विपक्ष का इस तरह सदन का बहुमूल्य समय नष्ट करना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा और अन्य विपक्षी दलों को न तो लोकतांत्रिक मूल्यों पर भरोसा है और न ही वे जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाना चाहते हैं।
सपा विधायक का अनोखा विरोध और आसन का कड़ा रुख
सदन की कार्यवाही के दौरान उस वक्त माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब एक सपा विधायक ने मुख्यमंत्री की तस्वीर हाथ में लेकर सदन के अंदर ही अनोखा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस अनुशासनहीनता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पहले विधायक को कड़ी चेतावनी दी, लेकिन बात न मानने पर उन्हें पूरे दिन के लिए सदन से बाहर जाने का निर्देश देना पड़ा। जब मार्शलों ने विधायक को बाहर ले जाने की कोशिश की, तो अन्य विपक्षी सदस्य उनके समर्थन में आ गए और सदन में भारी धक्का-मुक्की जैसी स्थिति पैदा हो गई।
सदस्यता रद्द करने की चेतावनी और अलोकतांत्रिक आचरण का आरोप
विपक्षी दलों द्वारा मार्शलों की कार्रवाई का कड़ा विरोध किए जाने पर विधानसभा अध्यक्ष ने सख्त तेवर अपनाते हुए चेतावनी दी कि संबंधित विधायक खुद सदन से बाहर चले जाएं, अन्यथा उनकी सदस्यता समाप्त करने तक के कड़े एक्शन पर विचार किया जा सकता है। इस पूरे हंगामे और अव्यवस्था के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो टूक शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी का यह अलोकतांत्रिक व्यवहार प्रदेश की जनता सीधे देख रही है और जनता चुनाव में इसका करारा जवाब देगी।
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