बांग्लादेश में तीस्ता नदी परियोजना को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार चर्चा की वजह चीन के राजदूत याओ वेन का वह बयान है, जिसमें उन्होंने साफ किया कि चीन इस परियोजना में किसी रणनीतिक मकसद से नहीं बल्कि केवल बांग्लादेश के अनुरोध पर शामिल हुआ है। ढाका में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि तीस्ता परियोजना का उद्देश्य केवल नदी क्षेत्र में रहने वाले लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है। चीन इस परियोजना के लिए तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने को तैयार है और इसके पीछे उसका कोई दूसरा एजेंडा नहीं है। हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत इस परियोजना पर पहले से अपनी चिंताएं जता चुका है। इसलिए चीन की इस सफाई को क्षेत्रीय राजनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
तारिक रहमान की चीन यात्रा के बाद तेज हुई परियोजना, सर्वे के बाद बढ़ेगा काम
हाल ही में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन का दौरा किया था, जहां दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इनमें तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना सबसे प्रमुख रही। इसी यात्रा के बाद चीन ने परियोजना को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। चीनी राजदूत ने बताया कि पहले चरण में विस्तृत सर्वे कराया जाएगा, जिसके आधार पर आगे की योजना तैयार होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली अंतरिम सरकार के दौरान एक चीनी कंपनी और बांग्लादेश की सरकारी संस्था के बीच जो समझौता ज्ञापन हुआ था, वह केवल संस्थागत स्तर का समझौता था। अब दोनों देशों की सरकारें सीधे इस परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही हैं। चीन का कहना है कि परियोजना पूरी तरह बांग्लादेश की जरूरतों और अपेक्षाओं के अनुरूप विकसित की जाएगी, ताकि नदी किनारे रहने वाले लोगों को बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में लाभ मिल सके।
भारत की चिंताओं पर चीन का जवाब, कहा- हमारा मकसद केवल सहयोग करना है
प्रेस वार्ता के दौरान जब चीन के राजदूत से पूछा गया कि अगर भारत ऊपरी हिस्से से पर्याप्त पानी नहीं छोड़ेगा तो परियोजना कितनी प्रभावी होगी, तो उन्होंने इस सवाल को सीधे भारत से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि यह चीन की चिंता का विषय नहीं है। उनका कहना था कि चीन केवल बांग्लादेश के अनुरोध पर तकनीकी और विकासात्मक सहयोग दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन किसी तीसरे देश के खिलाफ कोई रणनीति नहीं बना रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस परियोजना का भविष्य दोनों देशों के बीच जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर भी निर्भर करेगा। यही वजह है कि चीन का यह बयान भारत की चिंताओं को पूरी तरह खत्म नहीं करता, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति को और दिलचस्प बना देता है।
आर्थिक कॉरिडोर पर भी चीन का बड़ा संकेत, भारत के लिए छोड़ा खुला विकल्प
तीस्ता परियोजना के अलावा चीन ने बांग्लादेश-म्यांमार-चीन आर्थिक कॉरिडोर को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। याओ वेन ने कहा कि यह कोई नई योजना नहीं है, बल्कि करीब 15 साल पहले प्रस्तावित बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार (BCIM) आर्थिक कॉरिडोर का ही एक विस्तारित रूप है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह परियोजना पहले उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन अब चीन बांग्लादेश और म्यांमार के साथ इसे आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने भारत के लिए भी दरवाजे खुले होने की बात कही। उनका कहना था कि यदि भारत भविष्य में इस पहल का हिस्सा बनना चाहता है तो चीन उसका स्वागत करेगा, लेकिन इसमें शामिल होना पूरी तरह भारत का अपना निर्णय होगा। चीन के इस बयान को दक्षिण एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों और आर्थिक सहयोग की नई संभावनाओं के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है और क्षेत्रीय संतुलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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