आईटी सिटी कहे जाने वाले आधुनिक बेंगलुरु से एक ऐसा खौफनाक हादसा सामने आया है जिसने शहर के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। कर्नाटक बीजेपी मिल्क सेल के स्टेट कन्वीनर राघवेंद्र शेट्टी रोजमर्रा की तरह अपनी राह चल रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आगे उनका इंतजार एक गहरा गड्ढा कर रहा है। सफाई के नाम पर खोदे गए छह फीट गहरे खुले नाले में वह अचानक संतुलन खोकर जा गिरे। चीख-पुकार सुनकर आसपास के स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नाले की गहराई और पत्थरों की चोट से उनके दोनों पैरों में गंभीर फ्रैक्चर हो गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने जो खुलासा किया, उसने उनके होश उड़ा दिए। डॉक्टरों का कहना है कि चोट इतनी गंभीर है कि उन्हें अगले कम से कम छह महीने तक बेड रेस्ट पर रहना होगा और वह सामान्य तरीके से चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ रहेंगे।
मंत्री से लेकर विधायक तक के खिलाफ पुलिस में शिकायत
अपनी इस लाचारी और प्रशासनिक लापरवाही से नाराज होकर राघवेंद्र शेट्टी ने अब आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। अस्पताल के बिस्तर से ही उन्होंने शासन-प्रशासन की आंखें खोलने के लिए पुलिस का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने बेंगलुरु के इंचार्ज मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, स्थानीय विधायक बिरथी सुरेश और ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सीधे पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। बीजेपी नेता का साफ आरोप है कि नाले की सफाई का काम कई दिन पहले पूरा कर लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों ने उसे खुला छोड़ दिया। काम खत्म होने के बाद वहां न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही किसी तरह की बैरिकेडिंग की गई थी। अगर सुरक्षा के बुनियादी नियमों का पालन किया गया होता, तो आज उन्हें जीवन के छह महीने अस्पताल और बिस्तर पर नहीं गुजारने पड़ते।
शहर में जगह-जगह खुले पड़े हैं ‘मौत के कुएं’
यह घटना केवल एक नेता के साथ हुआ हादसा भर नहीं है, बल्कि यह बेंगलुरु की सड़कों पर रोज आवाजाही करने वाले लाखों नागरिकों के उस दर्द को बयां करती है जिसे वे झेलने को मजबूर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शहर में विकास कार्य और सफाई के नाम पर गड्ढे खोद देना आम बात हो चुकी है, लेकिन काम खत्म होने के बाद उन्हें उसी हाल में लावारिस छोड़ दिया जाता है। बारिश और अंधेरे के समय ये खुले नाले और गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं। लोगों का कहना है कि जब एक सत्ताधारी दल से जुड़े प्रमुख नेता की यह हालत हो सकती है और उन्हें इंसाफ के लिए भटकना पड़ रहा है, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? प्रशासन की इस बेरुखी और लापरवाही के कारण पूरे इलाके के निवासियों में भारी रोष व्याप्त है और वे जल्द से जल्द सभी खुले नालों को बंद करने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों में मचा हड़कंप, अब तक नहीं आया कोई जवाब
बीजेपी नेता राघवेंद्र शेट्टी की इस हाई-प्रोफाइल शिकायत के बाद पुलिस महकमे और नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायत दर्ज कर ली है और घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ-साथ जांच शुरू कर दी है। हालांकि, इतने बड़े आरोप लगने के बावजूद संबंधित मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, विधायक या फिर GBA के अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है। फिलहाल हर किसी की नजरें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस खुले नाले के जिम्मेदार बड़े अफसरों और ठेकेदारों पर गाज गिरेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। यह घटना निश्चित तौर पर शहरी प्रशासन के मुंह पर एक करारा थप्पड़ है जो कागजों पर तो बड़े-बड़े सुरक्षा के दावे करता है, लेकिन जमीन पर जनता को हादसों के भरोसे छोड़ देता है।
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