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SIR पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, BJP का कांग्रेस पर पलटवार- ‘अब मांगे माफी राहुल गांधी’

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक बताया है। फैसले के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि अब उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए।

SIR

सुप्रीम कोर्ट ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक और वैध बताया है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों के दायरे में रहकर काम किया है और इस प्रक्रिया में कोई बड़ी खामी नहीं पाई गई। कोर्ट ने साफ कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए वोटर लिस्ट का सही होना जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि SIR प्रक्रिया के दौरान उठाए गए कदम जरूरत के मुताबिक थे। इस फैसले के बाद Bharatiya Janata Party ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विपक्ष का पूरा एजेंडा बेनकाब हो गया है। फैसले के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है और दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

बीजेपी प्रवक्ता Pradeep Bhandari ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी शुरू से ही SIR प्रक्रिया का विरोध कर रही थी क्योंकि वे अवैध घुसपैठियों के साथ खड़े दिखाई दे रहे थे। प्रदीप भंडारी ने सवाल उठाया कि अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को सही ठहराया है, तो क्या राहुल गांधी देश से माफी मांगेंगे? बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्ष ने बिना वजह चुनाव आयोग और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। पार्टी का दावा है कि अदालत के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई पूरी तरह कानूनी थी। सोशल मीडिया पर भी बीजेपी नेताओं और समर्थकों ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कई पोस्ट किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि SIR प्रक्रिया को सिर्फ इसलिए गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया से अलग है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को नियम और प्रक्रिया तय करने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति के दस्तावेज सही नहीं पाए जाते, तो चुनाव आयोग उसका नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने से इनकार कर सकता है। हालांकि अदालत ने साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी की नागरिकता तय कर रहा है। कोर्ट के मुताबिक आयोग सिर्फ मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित कर रहा है। अदालत ने यह भी माना कि SIR संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून की कसौटी पर खरा उतरता है। फैसले में कहा गया कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सही वोटर लिस्ट जरूरी है और इस दिशा में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

फैसले के बाद और तेज हो सकती है राजनीति

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। कांग्रेस पहले से ही SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती रही है और इसे लोगों को वोटिंग अधिकार से बाहर करने की कोशिश बता चुकी है। वहीं बीजेपी लगातार इसे वोटर लिस्ट को साफ और पारदर्शी बनाने का कदम बता रही है। अब अदालत के फैसले के बाद बीजेपी को नया राजनीतिक मुद्दा मिल गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इस मुद्दे का असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है। फिलहाल विपक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। इस पूरे विवाद ने चुनावी राजनीति को एक बार फिर गर्म कर दिया है।

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