महिला आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। जहां एक तरफ केंद्र सरकार विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि 2023 में पारित हो चुके विधेयक को अब तक लागू नहीं किया गया। इसी कड़ी में महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब संसद ने सर्वसम्मति से महिला आरक्षण बिल पास कर दिया था, तो इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक बहस और भी तेज होती जा रही है।
अलका लांबा ने सरकार की नीयत पर उठाए सवाल
अलका लांबा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून को लागू करने में जानबूझकर देरी की। उन्होंने कहा कि महिला विरोधी सोच के कारण 30 महीने तक इसका नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया। उनके अनुसार, अगर सरकार चाहती तो इस कानून को पहले ही लागू किया जा सकता था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर सरकार संसद की सीटों में बढ़ोतरी और परिसीमन के बाद ही महिला आरक्षण लागू करना क्यों चाहती है। क्या मौजूदा 543 सीटों पर ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिया जा सकता? इन सवालों के साथ उन्होंने सरकार की मंशा पर संदेह जताया।
2024 में लागू होने पर बदल सकती थी तस्वीर
अलका लांबा ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि अगर 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू कर दिया गया होता, तो आज संसद की तस्वीर पूरी तरह अलग होती। उनके अनुसार, मौजूदा 543 सीटों में से लगभग 180 सीटों पर महिलाएं निर्वाचित होकर संसद में बैठतीं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण का एक बड़ा कदम होता। उनका मानना है कि इस देरी से महिलाओं को उनका हक मिलने में बाधा आई है।
मॉनसून सत्र में दबाव बनाने की तैयारी
महिला कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर अब बड़ा अभियान शुरू करने की योजना बनाई है। अलका लांबा ने बताया कि आगामी संसद के मॉनसून सत्र में सरकार पर दबाव बनाया जाएगा, ताकि महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू किया जा सके। इसके अलावा देशभर में हस्ताक्षर अभियान और पोस्टकार्ड अभियान चलाने की भी तैयारी है। इन अभियानों के जरिए सरकार को महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण के साथ-साथ ओबीसी महिलाओं को भी इसमें शामिल करने की मांग की जाएगी।
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