पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय बाकी है, लेकिन सूबे की राजनीति में अभी से भूचाल आ गया है। कांग्रेस के भीतर का सियासी कलेश एक बार फिर सरेआम हो चुका है। बीते बुधवार (22 जुलाई) को नई दिल्ली में बुलाई गई आलाकमान की उच्चस्तरीय रणनीति बैठक में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सामने ही चिनगारियां सुलग उठीं। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने खुलकर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की कार्यप्रणाली और उनके नेतृत्व पर तीखे सवाल खड़े कर दिए। चन्नी का साफ़ तौर पर मानना है कि मौजूदा नेतृत्व के साथ चुनावी नैया पार लगाना बेहद मुश्किल है।
चन्नी का बड़ा दांव: ‘वडिंग अध्यक्ष रहे तो छोड़ दूंगा पद’
बैठक के दौरान माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब चरणजीत सिंह चन्नी ने आर-पार की रणनीति अपना ली। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि अगर राजा वडिंग पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं, तो वे खुद चुनाव प्रचार समिति (Campaign Committee) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को तैयार हैं। चन्नी ने तल्ख तेवरों में दावा किया कि वडिंग के नेतृत्व में पार्टी अगला विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकती। उनका यह रुख साफ इशारा करता है कि पंजाब कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा और अंदरूनी मतभेद अब खुलकर सतह पर आ चुके हैं।
वडिंग के खिलाफ एकजुट हुआ विरोधी खेमा, रंधावा और राणा भी हमलावर
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में केवल चरणजीत सिंह चन्नी ही नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस के कई अन्य दिग्गज चेहरे भी वडिंग के खिलाफ एक मंच पर नजर आए। पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और वरिष्ठ नेता राणा गुरजीत सिंह ने भी चन्नी के सुर में सुर मिलाते हुए प्रदेश नेतृत्व पर जोरदार निशाना साधा। संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुई इस बैठक में वडिंग के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरने का सीधा विरोध किया गया। सांसद अमर सिंह और गुरजीत औजला जैसे दिग्गजों की मौजूदगी ने इस विवाद को और गहरा बना दिया है।
क्या आलाकमान संभालेगा कमान? वडिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती
पंजाब चुनाव से पहले कांग्रेस की यह कलह पार्टी आलाकमान के लिए सबसे बड़ा दर्द बन गई है। एक तरफ जहां पार्टी राज्य में वापसी के सपने देख रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनों का ही बिखराव जीत की राह में रोड़ा अटका रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग इस सियासी तूफान का मुकाबला कैसे करते हैं और केंद्रीय नेतृत्व इस आंतरिक जंग को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या वडिंग अपनी कुर्सी बचा पाएंगे या फिर चन्नी की नाराजगी पार्टी में किसी नए बड़े बदलाव की वजह बनेगी, इसका फैसला आने वाला वक्त ही तय करेगा।
